दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर गुरुवार शाम वह नज़ारा किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं था। यात्रियों से भरे टर्मिनल पर अचानक घोषणाएँ रुक गईं, मॉनिटर बोर्ड पर “Delayed” की लंबी लिस्ट चमकने लगी, और एक-एक कर पायलटों को टेकऑफ क्लियरेंस रद्द होते दिखाई दिए।
दरअसल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के भीतर एक अहम सॉफ्टवेयर प्रणाली — Automatic Message Switching System (AMSS) — अचानक ठप हो गई। यह वही सिस्टम है जो उड़ानों के बीच डेटा ट्रांसफर, रूटिंग और संचार को नियंत्रित करता है। इसके बंद होते ही पूरा नेटवर्क गड़बड़ा गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तकनीकी गड़बड़ी शाम करीब 5 बजे शुरू हुई और देर रात तक पूरी तरह से सामान्य नहीं हो सकी। इसके कारण दिल्ली एयरपोर्ट से उड़ान भरने और वहां उतरने वाली 100 से अधिक फ्लाइट्स दो से तीन घंटे तक विलंबित रहीं। इस असर ने देश के दूसरे बड़े एयरपोर्ट्स तक जाल की तरह फैलकर पूरे एविएशन नेटवर्क को झटका दे दिया।
एयरपोर्ट के अंदर यात्रियों की लंबी कतारें, सूटकेसों के ढेर और परेशान चेहरों ने हालात को और कठिन बना दिया। कोई अपने घरेलू कार्यक्रम में फँस गया, तो कोई अंतरराष्ट्रीय उड़ान मिस कर बैठा। यात्रियों की शिकायत थी कि एयरलाइंस की जानकारी अपडेट नहीं थी और मदद के लिए स्टाफ भी सीमित था।
50 इंजीनियर, 18 घंटे और एक सॉफ्टवेयर की जंग
तकनीकी टीम के लिए यह घटना एक आपात स्थिति से कम नहीं थी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने तुरंत संयुक्त कार्रवाई शुरू की।
करीब 50 से अधिक इंजीनियरों की टीम ने रात भर काम किया ताकि AMSS सिस्टम को दोबारा सक्रिय किया जा सके। ये विशेषज्ञ सर्वर से लेकर डेटा लिंक और फेलओवर सिस्टम तक हर हिस्से की जांच में जुटे रहे।
सूत्रों के अनुसार, यह दिक्कत किसी हार्डवेयर फॉल्ट से नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर में कम्युनिकेशन बॉटलनेक के कारण उत्पन्न हुई थी। इसका मतलब था कि कंट्रोलर को हर फ्लाइट प्लान को मैन्युअली प्रोसेस करना पड़ रहा था — जो सामान्य परिस्थितियों में स्वचालित रूप से होता है। यही वजह थी कि औसतन 10-15 मिनट की प्रक्रिया बढ़कर 45-50 मिनट तक खिंच गई।
इस देरी का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। लखनऊ, जयपुर, अमृतसर, अहमदाबाद और मुंबई के एयरपोर्टों पर भी कई उड़ानें अपने स्लॉट मिस कर गईं।
इंडिगो, स्पाइसजेट, एयर इंडिया और विस्तारा जैसी कंपनियों ने यात्रियों से माफी मांगते हुए कहा कि “तकनीकी कारणों के चलते संचालन प्रभावित है, कृपया धैर्य रखें।”
यात्रियों की परेशानियाँ और सीख
शुक्रवार सुबह तक स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी, लेकिन तब तक हज़ारों यात्री देरी की मार झेल चुके थे। टर्मिनल-3 पर खड़ी अंजलि शर्मा नामक यात्री ने बताया, “हमारी फ्लाइट शाम 6 बजे की थी, पर बोर्डिंग रात 10 बजे के बाद शुरू हुई। कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी।”
एयरलाइंस ने यात्रियों को ई-मेल और SMS के माध्यम से अपडेट देने की कोशिश की, लेकिन अचानक हुए इस तकनीकी झटके ने संचार चैनल को भी प्रभावित किया।
यात्रा विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना आधुनिक विमानन प्रणाली की संवेदनशीलता को उजागर करती है। एक छोटी तकनीकी गड़बड़ी से भी कैसे राष्ट्रीय स्तर पर उड़ानों की लय बिगड़ सकती है, यह इसका बड़ा उदाहरण है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि अब सिस्टम की विस्तृत जांच होगी ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न दोहराई जाए। साथ ही, AAI ने यह भी संकेत दिया है कि ATC सिस्टम को अब क्लाउड-बेस्ड रेडंडेंसी मोड में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे भविष्य में तकनीकी विफलता के बावजूद संचालन जारी रह सके।
