पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद बधाइयों का दौर जारी है, लेकिन इस बार एक विदेशी प्रतिक्रिया ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को जीत की शुभकामनाएं दीं, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया। आमतौर पर राज्य स्तर के चुनावों पर अंतरराष्ट्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया कम ही देखने को मिलती है, ऐसे में ट्रंप का यह संदेश चर्चा का केंद्र बन गया है। इस घटनाक्रम ने भारत की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
संजय राउत की कड़ी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल का चुनाव भारत का आंतरिक मामला है और इस पर बाहरी टिप्पणी उचित नहीं है। राउत ने अपने संदेश में यह भी लिखा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी होती है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
राउत ने अपने बयान में दावा किया कि चुनाव नतीजों को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें डर, दबाव और निष्पक्षता की कमी जैसे आरोप शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि चुनाव आयोग का रवैया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रहा। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी की आईटी सेल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की खबरों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या हर छोटे चुनाव पर विदेशी नेताओं की बधाई दी जाएगी, और क्या यह परंपरा सही मानी जा सकती है।
Dear President @realDonaldTrump
Greetings.
As a Member of Parliament from India, I write in response to reports of your congratulations to PM Narendra Modi on the West Bengal Assembly election results.
These are state-level elections—an internal matter of India’s federal…
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) May 8, 2026
‘आंतरिक मामला’ बताकर दूरी बनाने की अपील
अपने बयान के अंत में राउत ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है और यहां के चुनाव पूरी तरह देश के आंतरिक विषय हैं। उन्होंने ट्रंप से अपील की कि इस तरह के मामलों से दूरी बनाए रखें। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यह जरूरी नहीं है कि उनका संदेश ट्रंप तक पहुंचे, लेकिन एक नागरिक और जनप्रतिनिधि के तौर पर अपनी बात रखना उनका कर्तव्य है। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या अंतरराष्ट्रीय नेताओं को किसी देश के आंतरिक राजनीतिक मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करनी चाहिए या नहीं।
