लद्दाख के डीजीपी एसडी सिंह जमवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि 24 सितंबर को केंद्र सरकार और स्थानीय नेताओं के बीच होने वाली बातचीत से पहले माहौल अचानक हिंसक हो गया। डीजीपी ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक समेत कुछ लोगों ने मंच का इस्तेमाल भड़काऊ भाषणों के लिए किया, जिससे हालात बेकाबू हो गए। करीब पांच से छह हजार लोगों की भीड़ ने सरकारी इमारतों और राजनीतिक दलों के दफ्तरों पर हमला किया। इस हिंसा में चार लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।
पाकिस्तान और बांग्लादेश लिंक का आरोप
डीजीपी का दावा है कि जांच में ऐसे संकेत मिले हैं, जो पाकिस्तान और बांग्लादेश से संपर्क की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की टीम के कुछ लोग हाल ही में बांग्लादेश गए थे और पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क में थे। हालांकि, इस पर आधिकारिक दस्तावेज अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस एंगल पर गंभीरता से जांच कर रही हैं।
सरकार की सख्त नजर, आगे की कार्रवाई तय
सरकार अब इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाए हुए है। 6 अक्टूबर को उच्च स्तरीय समिति की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें केंद्र के शीर्ष अधिकारी और स्थानीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। उम्मीद है कि इस बैठक में हालात को सामान्य करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। वहीं, सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
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