सोशल मीडिया पर इन दिनों Cow Urine Face Wash Viral Video तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लाखों लोगों को हैरानी में डाल दिया है। वीडियो में एक विदेशी महिला, जिसे लोग प्यार से “गोरी मैम” कह रहे हैं, चेहरे पर साबुन या फेसवॉश नहीं बल्कि गाय के मूत्र से हाथ और चेहरा धोती नजर आती है। यह वीडियो दक्षिण सूडान के एक दूरदराज इलाके में रिकॉर्ड किया गया है, जहां आज भी कई जनजातियां आधुनिक जीवन से बिल्कुल अलग तरीके से रहती हैं। जैसे ही यह वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर सामने आया, लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कोई इसे अजीब बता रहा है तो कोई इसे प्राकृतिक जीवनशैली का सम्मान कह रहा है। वीडियो की खास बात यह है कि महिला खुद कैमरे पर बताती है कि वह किसी मजाक या स्टंट के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय परंपरा को समझने और अपनाने के लिए ऐसा कर रही है। यही बात इस वायरल वीडियो को सामान्य कंटेंट से अलग बनाती है और लोग पूरी कहानी जानने के लिए इसे बार-बार देख रहे हैं।
मुंडारी जनजाति और गाय का अनोखा रिश्ता
दक्षिण सूडान को दुनिया के सबसे कम देखे जाने वाले देशों में गिना जाता है। यहां रहने वाली मुंडारी जनजाति के लिए गाय सिर्फ एक जानवर नहीं बल्कि जीवन का आधार है। इस जनजाति की पूरी संस्कृति, भोजन, रहन-सहन और परंपराएं गाय के इर्द-गिर्द घूमती हैं। मुंडारी लोग गाय के दूध से लेकर गोबर और गोमूत्र तक का उपयोग रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं। उनके अनुसार, गाय का मूत्र प्राकृतिक रूप से शरीर को ठंडक देता है और त्वचा को तेज धूप से बचाता है। इसी कारण वे इसे सनस्क्रीन की तरह इस्तेमाल करते हैं। Cow Urine Face Wash Viral Video में दिखाई गई महिला भी इसी परंपरा को अपनाती नजर आती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे त्वचा पर कीड़े-मकौड़ों का असर नहीं होता और गर्म मौसम में शरीर सुरक्षित रहता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी मुंडारी जनजाति इसे पूरी आस्था के साथ निभाती है।
गोमूत्र को क्यों मानते हैं प्राकृतिक सुरक्षा कवच?
वायरल वीडियो में विदेशी महिला बताती है कि मुंडारी जनजाति के लोग गाय के मूत्र को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक मानते हैं। उनके अनुसार, यह मच्छरों को दूर भगाने में मदद करता है, जो मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। Cow Urine Face Wash Viral Video में यह भी दावा किया गया है कि गोमूत्र त्वचा को साफ रखने के साथ-साथ संक्रमण से भी बचाव करता है। जनजाति के लोग इससे न सिर्फ चेहरा धोते हैं, बल्कि कई बार पूरे शरीर पर लगाते हैं। यहां तक कि कुछ लोग इसे बालों के रंग और मजबूती के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि आधुनिक विज्ञान इन दावों पर अलग-अलग राय रखता है, लेकिन यह साफ है कि कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों में रहने वाली इस जनजाति ने अपने अनुभव से ऐसे तरीके अपनाए हैं, जो उनके जीवन के अनुकूल हैं। यही वजह है कि विदेशी टूरिस्ट भी उनकी परंपराओं को समझने और अनुभव करने के लिए उत्सुक रहते हैं।
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लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
जैसे ही Cow Urine Face Wash Viral Video इंटरनेट पर वायरल हुआ, लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गईं। कुछ यूजर्स ने इसे अंधविश्वास और अजीब परंपरा बताया, जबकि कई लोगों ने इसे संस्कृति का सम्मान करने वाला कदम कहा। सोशल मीडिया पर यह बहस भी छिड़ गई कि क्या हर पारंपरिक तरीके को आधुनिक नजरिए से गलत ठहराना सही है। कई यूजर्स का कहना है कि हर समाज की अपनी परिस्थितियां और समाधान होते हैं, जिन्हें समझे बिना जज नहीं करना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसे प्रयोग सुरक्षित हैं। बावजूद इसके, यह वीडियो दुनिया को एक ऐसी संस्कृति से रूबरू कराता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यही वजह है कि यह खबर सिर्फ वायरल कंटेंट नहीं, बल्कि अलग जीवनशैली को समझने का एक मौका बन गई है।
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