राजस्थान की राजधानी जयपुर में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुकी है। हवामहल विधानसभा क्षेत्र से सामने आए एक वायरल वीडियो ने चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) फोन पर किसी व्यक्ति से तीखी बहस करते हुए नजर आ रहे हैं। बातचीत के दौरान बीएलओ इतने तनाव में दिखते हैं कि वह कह देते हैं, “पूरी बस्ती ही हटा दूँ क्या? बस 50 नाम रहने दूँ, फिर तो आप और महाराज (विधायक बालमुकुंद आचार्य) चुनाव जीत जाएंगे।” बात यहीं नहीं रुकती, मानसिक दबाव में आए बीएलओ यह तक कह देते हैं कि वह कलेक्टर के पास जाकर आत्महत्या कर लेंगे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है और आम लोगों से लेकर राजनीतिक दलों तक में हड़कंप मचा हुआ है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर एक सरकारी कर्मचारी इतना दबाव महसूस कर रहा है, तो SIR प्रक्रिया वास्तव में कितनी पारदर्शी है।
‘फर्जी वोट’ के आरोप और बीएलओ का खुला विरोध
वायरल बातचीत में फोन पर मौजूद व्यक्ति कुछ मतदाताओं को ‘फर्जी’ बताकर उनके नाम हटाने का दबाव बनाता सुनाई देता है। इस पर बीएलओ खुलकर विरोध करते हैं और कहते हैं कि जिन लोगों के नाम हटाने की बात की जा रही है, वे यहीं के स्थायी निवासी हैं। बीएलओ का कहना है कि इन मतदाताओं के पास मकान के पट्टे, आधार कार्ड, वोटर आईडी जैसे सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं। बीएलओ यह भी कहते हैं कि अगर उन्होंने कोई गलत नाम जोड़ा है तो उन्हें निलंबित कर दिया जाए या 20 लोगों की नई टीम बनाकर जांच करवा ली जाए। इसी बीच यह भी सामने आया है कि मतदाता सूची से नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 के जरिए आपत्तियां मांगी जा रही हैं और आज इसकी अंतिम तिथि है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इसी आखिरी मौके का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में चुनिंदा मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश की जा रही है, जिससे चुनावी समीकरण बदले जा सकें।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी जी की बात पर मुहर लगाता जयपुर का यह वीडियो जिसमे SC/ST व मुस्लिमों के वोट (वोटर लिस्ट) से काटने का BLO पर दबाव बनाया जा रहा है ।
SIR में टारगेट कर लोगों के नाम काटे जा रहे हैं,कारण पूछने पर झूठ बोला जा रहा है।
वोट का अधिकार छीनना संविधान पर हमला है-… pic.twitter.com/3gXYpHEjuv
— Pratap Khachariyawas (@PSKhachariyawas) January 15, 2026
SIR के बहाने वोट कटने का डर, नेताओं ने खोला मोर्चा
मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं को अलर्ट करते हुए कहा कि SIR के जरिए कांग्रेसी वोटर्स के नाम कटवाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अपील की कि सभी कार्यकर्ता सतर्क रहें और किसी भी वैध वोट को कटने न दें। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने इसे आखिरी चरण की “बड़ी प्लानिंग” बताया। उनका आरोप है कि अमित शाह और बीएल संतोष के दौरे के बाद एक पेनड्राइव के जरिए विधानसभा वार डेटा दिया गया और फर्जी फॉर्म भरवाकर, डेटा माइनिंग के माध्यम से वोट काटने का खेल चल रहा है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में हजारों वोट काटने की शिकायतें आईं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही व्यक्ति द्वारा 500 से 700 वोट काटने की शिकायत कैसे दी जा सकती है और इन फॉर्म्स की जांच सीसीटीवी फुटेज से क्यों नहीं कराई जा रही।
प्रशासन की चुप्पी और लोकतंत्र की परीक्षा
हवामहल जैसे संवेदनशील इलाके से इस तरह का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ बीएलओ मानसिक दबाव की बात कर रहा है, दूसरी तरफ राजनीतिक दल खुलेआम एक-दूसरे पर लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगा रहे हैं। आम मतदाताओं में यह डर बैठ गया है कि कहीं उनका नाम भी चुपचाप मतदाता सूची से न हटा दिया जाए। अब सबकी निगाहें कलेक्टर और चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वे इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। अगर समय रहते पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह विवाद आने वाले चुनावों की विश्वसनीयता पर गहरा असर डाल सकता है। जयपुर से उठा यह मामला अब पूरे राजस्थान में SIR प्रक्रिया की सच्चाई और मंशा पर बहस का केंद्र बन चुका है।
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