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क्या किडनी दान एक साज़िश में बदल गया?… रोहिणी आचार्य के धमाकेदार खुलासे से बिहार की राजनीति में मचा तूफ़ान

बिहार की राजनीति में रोहिणी आचार्य का भावुक पोस्ट फिर चर्चा में है। किडनी विवाद, परिवारिक तनाव और राजनीतिक आरोपों पर रोहिणी का दर्द भरा खुलासा। जानिए पूरा मामला,

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बिहार की राजनीति इन दिनों सिर्फ चुनावी उठापटक से नहीं, बल्कि लालू परिवार के भीतर चल रहे तनाव से भी सुलग रही है। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर ऐसा पोस्ट शेयर किया जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। बेहद भावुक अंदाज में रोहिणी ने दावा किया कि उन्हें गालियां दी गईं और उनके पिता को लगाई गई उनकी किडनी को “गंदी किडनी” कहकर अपमानित किया गया। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन पर टिकट और करोड़ों रुपये के बदले किडनी देने तक का आरोप लगाया गया, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। रोहिणी के मुताबिक, यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि निजी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान से जुड़ा है, और वही बात उन्हें आज फिर सार्वजनिक रूप से बोलने पर मजबूर कर गई।

‘करोड़ों लिए और टिकट लिया’— रोहिणी के बड़े आरोप ने बढ़ाई रहस्यमयता

रोहिणी के पोस्ट में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह था जिसमें उन्होंने साफ लिखा कि उन्हें खुलेआम गालियां दी गईं और उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने “किडनी देने के बदले करोड़ों रुपये लिए और टिकट लेकर ही पिता को किडनी लगवाई।” उन्होंने भावुक लहजे में लिखा कि किसी बेटी पर ऐसा आरोप लगाना उसके त्याग का नहीं, बल्कि उसकी इंसानियत का अपमान है। उन्होंने कहा कि जो लोग किडनी जैसे पवित्र दान के पीछे स्वार्थ खोजते हैं, वे शायद परिवार और रिश्तों की कीमत नहीं समझते। रोहिणी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जब उन्होंने किडनी दी, तब उन्होंने न चुनाव सोचा, न राजनीतिक भविष्य और न किसी आर्थिक लाभ की उम्मीद—यह फैसला सिर्फ एक बेटी का था जो अपने पिता की जिंदगी बचाना चाहती थी। इस बयान ने पूरे विवाद को एक ऐसे रहस्य और भावनात्मक संघर्ष से जोड़ दिया जिसने कई नए सवालों को जन्म दे दिया।

‘मेरी गलती मत दोहराना’— बहनों और बेटियों को चेतावनी, विवाद और गहरा

पोस्ट के आखिरी हिस्से में रोहिणी अचानक बेहद गुस्सैल और दर्दभरे अंदाज में दिखीं। उन्होंने लिखा कि सभी बहनें और बेटियाँ यह सीख लें कि अपने मायके में बेटा या भाई मौजूद हो तो कभी भूल से भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए किडनी न दें। उन्होंने तंज भरे स्वर में कहा कि “जिस घर में बेटा हो, वह अपनी किडनी दे या अपने किसी दोस्त की लगवा दे।” रोहिणी के इस बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किडनी देते समय उन्होंने न पति की परवाह की, न बच्चों की, न ससुराल से अनुमति ली—सिर्फ पिता को बचाने के भाव ने उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर किया। लेकिन आज उसी किडनी को “गंदा” कहकर जिस तरह उनकी नीयत पर सवाल उठाए गए, उससे उन्होंने कहा कि कोई बेटी उनकी गलती नहीं दोहराए। उनका संदेश जितना भावुक था, उतना ही सस्पेंस और नाराजगी से भरा, जिसने इस पूरे विवाद को नई दिशा दे दी है।

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