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ईरान हमले पर कांग्रेस में दरार? ‘सरेंडर’ विवाद के बीच शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी को दे दी नसीहत!

ईरान हमले पर कांग्रेस और मोदी सरकार के बीच विवाद गहराया। सोनिया गांधी के बयान के बीच Shashi Tharoor ने ‘संयम’ को बताया ताकत, सरेंडर विवाद पर दी बड़ी नसीहत। पूरा मामला जानें।

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अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद भारत की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर सवाल उठा रही है और प्रधानमंत्री Narendra Modi के रुख को लेकर निशाना साध रही है। पार्टी के कुछ नेताओं ने सरकार की चुप्पी को ‘सरेंडर’ करार दिया और कहा कि भारत को इस मुद्दे पर ज्यादा मुखर होना चाहिए था। इस पूरे विवाद के बीच पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।

सरकार के रुख पर उठाए गए सवाल

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने भी इस मुद्दे पर एक लेख लिखकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने ईरान में हुए हमलों और वहां के नेतृत्व पर पड़े असर का जिक्र करते हुए भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उनके इस लेख के बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह बहस तेज हो गई। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की, जिससे भारत की छवि प्रभावित हो सकती है।

Shashi Tharoor का अलग रुख

इसी बीच कांग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक Shashi Tharoor ने अपनी ही पार्टी की लाइन से अलग राय रखी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों में संयम बरतना जरूरी होता है। उन्होंने साफ कहा कि संयम को ‘सरेंडर’ कहना गलत है, बल्कि यह एक मजबूत और समझदारी भरा कदम होता है। थरूर के इस बयान को पार्टी के भीतर अलग सोच के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि किसी भी देश को पहले अपने हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए और जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए।

बीजेपी ने भी उठाया मुद्दा

Shashi Tharoor के बयान के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। बीजेपी नेताओं ने इसे कांग्रेस के अंदर मतभेद का उदाहरण बताते हुए सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया। पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस खुद अपनी रणनीति को लेकर स्पष्ट नहीं है। वहीं, राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें विदेश नीति, राष्ट्रीय हित और राजनीतिक बयानबाजी तीनों शामिल हैं। फिलहाल यह मुद्दा सियासत के केंद्र में बना हुआ है और इस पर आगे और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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