लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद इस मुद्दे ने और तूल पकड़ लिया है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े होने का आरोप लगाया, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया। इस बयान के बाद विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं, जिनमें आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
पूजा पाल का समर्थन, विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
इस बीच समाजवादी पार्टी से निलंबित विधायक Pooja Pal ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान का समर्थन करते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार देने की दिशा में जो प्रयास किया गया, वह सराहनीय है। उनके मुताबिक, कुछ विपक्षी दल महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ खड़े नजर आए, जिससे यह बिल पास नहीं हो सका। पूजा पाल ने कहा कि महिलाओं को उनका हक मिलने से रोकना एक बड़ी राजनीतिक भूल है और इसका असर भविष्य में जरूर दिखेगा।
“महिलाएं अपमान नहीं भूलतीं”, 2027 को लेकर बड़ा दावा
पूजा पाल ने अपने बयान में साफ कहा कि महिलाएं अपने साथ हुए अपमान को कभी नहीं भूलतीं। उन्होंने कहा कि सालों से महिलाओं को दबाया गया, लेकिन अब उनमें जागरूकता और शक्ति दोनों बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, जो दल महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े हुए हैं, उन्हें 2027 के चुनाव में इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में महिलाएं अपनी ताकत दिखाएंगी और अपने वोट के जरिए जवाब देंगी। इस बयान को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
संसद में व्यवहार पर तंज
पूजा पाल ने संसद में बिल गिरने के बाद विपक्षी नेताओं द्वारा मेज थपथपाने को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज जो नेता इस पर खुशी जता रहे हैं, उन्हें भविष्य में पछताना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं की स्थिति को समझते हुए उन्हें राजनीतिक भागीदारी देने की बात कही है। पूजा पाल का मानना है कि अगर अधिक महिलाएं संसद और विधानसभा में पहुंचती हैं, तो समाज में बदलाव तेज होगा और महिलाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।
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