फारबिसगंज की ठंडी हवा में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंचे, तो भीड़ का जोश मानो आसमान छूने लगा। मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज प्रधानमंत्री बनकर नहीं, आपका बेटा बनकर आया हूं। आपके सपने ही मेरी प्रतिज्ञा हैं।” उनकी यह बात सुनते ही जनसमूह में जयघोष गूंज उठा। मोदी ने अपने संबोधन में बिहार के विकास और सुरक्षा को NDA सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में बिहार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम देखे हैं।
फारबिसगंज की धरती से मोदी ने यह भी संदेश दिया कि केंद्र और राज्य की संयुक्त कोशिशें ही बिहार को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि गरीबों के घरों में अब बिजली है, महिलाओं के हाथ में गैस सिलेंडर है, और युवाओं के सपनों को पंख देने के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। लेकिन इस विकास यात्रा के बीच उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी।
“नतीजे आने दीजिए…” बयान ने बढ़ाया सस्पेंस
PM Modi ने अपने भाषण के बीच अचानक सस्पेंस भरे अंदाज़ में कहा, “कुछ दिनों पहले मैंने कांग्रेस–RJD के झगड़े को उजागर किया था। अब देखिए, झगड़ा और बढ़ गया है। कांग्रेस ने अपने उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को ही RJD के खिलाफ उतार दिया है।”
PM Modi यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि यह झगड़ा अभी शुरुआत है, असली नज़ारा तो तब देखने को मिलेगा जब चुनाव के नतीजे आएंगे। “नतीजे आने दीजिए, ये एक-दूसरे के बाल नोचेंगे,” उनके इस कथन ने मंच पर मौजूद भीड़ को ठहाकों में डूबो दिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह एक गहरी चोट साबित हुई।
मोदी ने कहा कि विपक्ष आज सत्ता की भूख में एक साथ दिखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उनकी नींव झगड़े और स्वार्थ पर टिकी है। उन्होंने व्यंग्य भरे लहज़े में कहा कि ये वही लोग हैं जिन्होंने बिहार को कभी ‘जंगलराज’ के अंधेरे में धकेल दिया था। अब वही लोग जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। मोदी ने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस और RJD के नेताओं के बयानों से पहले ही दरारें साफ नज़र आने लगी हैं।
बिहार की राजनीति में नई हलचल
PM Modi का यह सस्पेंस भरा बयान अब बिहार की राजनीति का नया केंद्र बन गया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पीएम मोदी ने जिस तरह महागठबंधन की आंतरिक फूट को उजागर किया है, वह वोटरों की मनोवृत्ति पर सीधा असर डाल सकता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी ने केवल विपक्ष की एकता पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी दे दिया है।
बिहार में इस समय चुनावी माहौल चरम पर है और मोदी का यह भाषण बीजेपी और एनडीए समर्थकों में नई ऊर्जा भर गया है। वहीं, विपक्षी दल इस बयान को ‘जनभावना से ध्यान भटकाने की रणनीति’ बता रहे हैं।
लेकिन एक बात साफ है — मोदी का यह संवाद सिर्फ एक भाषण नहीं था, बल्कि एक सस्पेंस भरा राजनीतिक संदेश था। इसमें यह इशारा था कि आने वाले नतीजे सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि विश्वास बनाम स्वार्थ के संघर्ष का फैसला करेंगे। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या सचमुच नतीजों के बाद वही होगा जो प्रधानमंत्री ने कहा — “ये एक-दूसरे के बाल नोचेंगे…”
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