महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा नेता और पूर्व सांसद नवनीत राणा ने जनसंख्या और धर्म से जुड़ा ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों से लेकर आम जनता तक बहस छेड़ दी है। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नवनीत राणा ने हिंदू समाज से अपील की कि वे कम से कम तीन से चार बच्चे पैदा करें। उनका कहना था कि देश में कुछ वर्ग जानबूझकर ज्यादा बच्चे पैदा कर रहे हैं और उनका मकसद भारत की सामाजिक संरचना को बदलना है। राणा के इस बयान के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं और सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है।
‘चार बीवियां, 19 बच्चे’ वाले बयान का जिक्र कर क्या कहना चाहती थीं राणा
नवनीत राणा ने अपने बयान में एक उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग खुलेआम दावा करते हैं कि उनकी चार बीवियां हैं और उनके 19 बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग यह भी कहते हैं कि वे 30 बच्चों का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए। राणा ने सवाल उठाया कि जब एक वर्ग बिना किसी झिझक के इतनी बड़ी संख्या में बच्चे पैदा कर रहा है, तो हिंदू समाज सिर्फ एक या दो बच्चों तक ही क्यों सीमित रहे। उन्होंने इसे सामाजिक संतुलन से जोड़ते हुए कहा कि जनसंख्या असंतुलन भविष्य में गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकता है।
‘भारत को पाकिस्तान जैसा बनाने की साजिश’ वाला आरोप
अपने बयान को और धार देते हुए नवनीत राणा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग ज्यादा बच्चे पैदा कर भारत को पाकिस्तान जैसा बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पारिवारिक मामला नहीं है, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा सवाल है। राणा का कहना था कि अगर एक वर्ग तेजी से बढ़ता रहा और दूसरा वर्ग सीमित परिवार नीति पर चलता रहा, तो आने वाले समय में इसका असर सामाजिक ताने-बाने और राजनीति पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसलिए हिंदू समाज को जागरूक होकर कम से कम तीन से चार बच्चे पैदा करने चाहिए, ताकि संतुलन बना रहे।
नगर निगम चुनाव और ठाकरे बंधुओं के गठबंधन पर भी साधा निशाना
नवनीत राणा ने सिर्फ जनसंख्या के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि मुंबई में होने वाले नगर निगम चुनाव और ठाकरे बंधुओं के संभावित गठबंधन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे अब राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुके हैं और वे खुद चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतरने से बच रहे हैं। राणा का दावा था कि अगर कोई भी पार्टी उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन करती है, तो उसका प्रदर्शन स्थानीय चुनावों में भी कमजोर रहेगा। उन्होंने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गठबंधन को मजबूरी का गठबंधन बताते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और आने वाले चुनावों में इसका जवाब देगी।
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