लखनऊ में इस बार दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव का आयोजन विशेष रूप से चर्चाओं में रहा, क्योंकि इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिस्सा लिया। शहर का माहौल आध्यात्मिकता से भरा रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए। मंच पर मौजूद संतों, विद्वानों और प्रमुख व्यक्तियों ने गीता के महत्व और जीवन में उसके अनुपालन पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का उद्देश्य था—गीता के सार्वभौमिक संदेश को लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाना।
सीएम योगी ने कहा– गीता जीवन का वास्तविक मार्गदर्शन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता के 700 श्लोक सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले गहरे संदेश हैं। उन्होंने बताया कि भारत का हर सनातन धर्मावलंबी गीता को जीवन का मंत्र मानकर चलता है और उसकी शिक्षाओं को अपनी दिनचर्या में अपनाने की कोशिश करता है। सीएम योगी ने यह भी कहा कि गीता मनुष्य को सही आचरण, साहस, कर्तव्य और धैर्य का पाठ सिखाती है। उनका कहना था कि जब समाज गीता के सिद्धांतों पर चलता है, तब उसमें समभाव, करुणा और समानता की भावना स्वतः विकसित होती है।
‘जियो और जीने दो’ है भारत की पहचान: सीएम योगी आदित्यनाथ
अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने भारत की सांस्कृतिक सोच और उसके वैश्विक संदेश पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी अपनी श्रेष्ठता का घमंड नहीं किया और हमेशा दूसरों का सम्मान किया। भारतीय संस्कृति सिखाती है कि हर जीव में ईश्वर का अंश है और इसलिए सबके साथ प्रेम और सद्भाव से रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘जियो और जीने दो’ का संदेश केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों की परंपरा है, जिसने दुनिया में शांति और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाया है।
RSS की सेवा पर बोले सीएम योगी, मोहन भागवत भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में मौजूद RSS प्रमुख मोहन भागवत का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बिना किसी जाति, वर्ग या भेदभाव के सेवा कार्य करता है। उन्होंने बताया कि RSS की यही निस्वार्थ सेवा भावना उसे समाज में एक विशेष स्थान देती है। कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने भी गीता के संदेशों को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि हर मानव के लिए जीवन को संतुलित ढंग से जीने का मार्गदर्शन है। कार्यक्रम का समापन मंत्रोच्चारण और गीता के श्लोकों के संगठित पाठ के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
