बिहार की राजनीति में उस वक्त अचानक हलचल तेज हो गई, जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से निष्कासित और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के ‘चूड़ा-दही’ भोज में शामिल होते नजर आए। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित इस भोज को आम तौर पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम माना जाता है, लेकिन तेज प्रताप यादव की मौजूदगी ने इसे पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया। खास बात यह रही कि विजय सिन्हा ने तेज प्रताप यादव का गर्मजोशी से स्वागत किया, जिससे यह सवाल उठने लगा कि क्या यह सिर्फ शिष्टाचार था या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट। कार्यक्रम में तेज प्रताप की सक्रियता और नेताओं से बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
RJD से अलग राह, अब नई राजनीतिक दिशा?
तेज प्रताप यादव हाल ही में आरजेडी से निष्कासित हुए हैं और इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल का गठन किया। यह कदम खुद में बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। तेज प्रताप लंबे समय से पार्टी और परिवार दोनों स्तर पर अलग-थलग चल रहे थे। विधानसभा चुनाव में सीट गंवाने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर मानी जा रही थी, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा से हाल की मुलाकात और फिर चूड़ा-दही भोज में शिरकत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तेज प्रताप अब नई राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं और क्या वह एनडीए के साथ किसी संभावित तालमेल की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
NDA में एंट्री पर तेज प्रताप का जवाब क्यों अहम?
कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने तेज प्रताप यादव से सीधे सवाल किया कि क्या वह एनडीए में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने बेहद संतुलित और सस्पेंस से भरा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “राजनीतिक विचारधाराएं भले अलग हों, लेकिन हमारी सांस्कृतिक विरासत एक है। बाकी बातों के बारे में समय आने पर पता चल जाएगा।” इस बयान ने राजनीतिक संकेतों को और गहरा कर दिया। उन्होंने न तो एनडीए में शामिल होने से इनकार किया और न ही खुलकर हामी भरी। यही वजह है कि उनका यह जवाब अब बिहार की राजनीति में संभावनाओं के नए दरवाजे खोलता नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप इस वक्त अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
विजय सिन्हा और NDA नेताओं की चुप्पी भी बनी चर्चा का विषय
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी तेज प्रताप यादव के NDA में शामिल होने के सवाल पर लगभग वही रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति सनातन संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जिसमें सभी बिहारी एकजुट होते हैं। आगे के सवालों पर उन्होंने भी यही कहा कि “समय आने पर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।” भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख संतोष कुमार सुमन जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और अहम बना दिया। हालांकि तेजस्वी यादव के इस भोज में शामिल होने को लेकर पूछे गए सवालों पर विजय सिन्हा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे राजनीतिक सस्पेंस और गहरा गया।
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