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चाचा-भतीजा फिर से एक होंगे? पशुपति पारस से मिलते ही चिराग पासवान ने छुए पैर, लिया आशीर्वाद

Chirag Paswan ने अपने पैतृक जिले खगड़िया में चाचा पशुपति पारस से मुलाकात की, पैरों पर आशीर्वाद लिया और दिवंगत चाचा को श्रद्धांजलि दी। परिवार और पार्टी में सियासी चर्चाओं को नया मोड़।

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केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) बीते सोमवार अपने पैतृक जिले खगड़िया पहुंचे। शहरबन्नी स्थित पैतृक आवास पर उन्होंने अपने दिवंगत चाचा अर्जुन पासवान को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान (Chirag Paswan) ने चाचा पशुपति पारस से मुलाकात की और उनका पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता और चर्चाओं को जन्म दिया है।

चाचा-भतीजा की मुलाकात से सियासी गलियारों में हलचल

पासवान परिवार में पिछले कुछ सालों से दूरियां बनी हुई थीं। लंबे समय के बाद चिराग (Chirag Paswan) और उनके चाचा पशुपति पारस के बीच यह मुलाकात नई उम्मीद जगा रही है। वीडियो में दिख रहा है कि चिराग पासवान (Chirag Paswan) चाचा के सामने हाथ जोड़कर बातचीत कर रहे हैं और पशुपति पारस ने चिराग के कंधे पर हाथ रखकर अपनी बातें कही। कार्यकर्ताओं के लिए यह क्षण बहुत खास रहा। इस मुलाकात से यह सवाल उठने लगा है कि क्या परिवार और पार्टी की दरार अब पिघलने लगी है और चाचा-भतीजा फिर से राजनीतिक मोर्चे पर एक साथ नजर आ सकते हैं।

समर्थकों का उत्साह और परिवारिक संवाद

श्रद्धांजलि सभा के दौरान चिराग पासवान (Chirag Paswan) के समर्थक जोर-शोर से उनका समर्थन करते रहे। हालांकि मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच क्या बातें हुईं, इसका वीडियो स्पष्ट रूप से नहीं दिखा रहा है। वहीं चिराग ने अपनी बड़ी मां राजकुमारी देवी से भी मुलाकात की, उनके कुशलक्षेम का हाल जाना और ढांढस बंधाया। इस संवाद ने परिवार के भीतर रिश्तों को सुधारने और सियासी कार्यकर्ताओं में उम्मीद जगाने का संदेश दिया।

राजनीतिक और पारिवारिक संकेत

चिराग पासवान (Chirag Paswan) की यह मुलाकात न सिर्फ पारिवारिक रिश्तों की मरम्मत का संकेत देती है, बल्कि पार्टी और राजनीतिक रणनीति पर भी असर डाल सकती है। अगर चाचा-भतीजा फिर से एक हो जाते हैं, तो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की स्थिति मजबूत हो सकती है और आगामी चुनावों में यह गठबंधन महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उत्सुकता इस बात से भी जाहिर है कि परिवार के इस मिलन की राजनीति में भी बड़ी भूमिका होगी।

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