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‘बहुत देर कर दी मेहरबां…’ कांशीराम को भारत रत्न की मांग पर चंद्रशेखर आजाद का बड़ा हमला, कांग्रेस से पूछे तीखे सवाल

कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग पर नगीना सांसद Chandrashekhar Azad ने कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी तब यह पहल क्यों नहीं की गई और अब इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

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Chandrashekhar Azad: देश की राजनीति में एक बार फिर दलित राजनीति के बड़े चेहरे Kanshi Ram को भारत रत्न देने की मांग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में Rahul Gandhi ने कांशीराम को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की बात उठाई, जिसके बाद अलग-अलग दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। इसी मुद्दे पर Chandrashekhar Azad ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मांग अब इसलिए उठाई जा रही है क्योंकि राजनीतिक माहौल बदल चुका है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और उनके समर्थक लंबे समय से कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग करते रहे हैं। आजाद ने यह भी कहा कि अगर अब सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सहमत हैं तो सरकार को सर्वसम्मति से यह सम्मान देने पर विचार करना चाहिए।

‘जब आपकी सरकार थी तब क्यों नहीं याद आए?’

नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांशीराम का निधन साल 2006 में हो गया था और उसके बाद 2014 तक देश में कांग्रेस की सरकार रही। ऐसे में उन्होंने पूछा कि उस समय कांशीराम को भारत रत्न देने की पहल क्यों नहीं की गई। (Chandrashekhar Azad) ने कहा कि अब जब दलित राजनीति का माहौल बदल रहा है और नए राजनीतिक आंदोलन खड़े हो रहे हैं, तब इस तरह की मांग उठाई जा रही है। उनके मुताबिक यह कदम कहीं न कहीं राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी नेता को वास्तव में कांशीराम के संघर्ष और योगदान का सम्मान करना है, तो सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा बल्कि उनके विचारों को भी व्यवहार में उतारना होगा।

आजाद समाज पार्टी के बढ़ते प्रभाव का जिक्र

चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने इस मुद्दे को अपनी पार्टी के बढ़ते प्रभाव से भी जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से उनके संगठन और कार्यकर्ता लगातार सामाजिक न्याय और दलित अधिकारों के मुद्दे उठाते रहे हैं। इसी कारण अब देश की राजनीति में कांशीराम के योगदान पर फिर से चर्चा होने लगी है। आजाद के मुताबिक उनके संगठन के कार्यकर्ताओं ने जमीन पर काफी मेहनत की है और सामाजिक मुद्दों को मजबूती से उठाया है। (Chandrashekhar Azad) ने कहा कि अगर किसी महापुरुष को सम्मान दिया जाता है तो उनके विचारों को भी सम्मान देना जरूरी है। सिर्फ सम्मान की घोषणा कर देना और उनकी विचारधारा को लागू न करना दोहरे रवैये जैसा होगा।

सर्वसम्मति से सम्मान देने की उठाई मांग

चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने कहा कि अगर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर सहमत हैं तो संसद में सर्वसम्मति से प्रस्ताव लाकर कांशीराम को भारत रत्न देने का फैसला किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद संसद में इस मुद्दे को उठाने की कोशिश करेंगे ताकि इस पर गंभीर चर्चा हो सके। इसके साथ ही उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कांशीराम हमेशा अपने समर्थकों को यह संदेश देते थे कि विरोधियों के भ्रम में नहीं आना चाहिए और अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। आजाद ने कहा कि कार्यकर्ताओं को और अधिक मेहनत करने की जरूरत है ताकि सामाजिक बदलाव की यह लड़ाई आगे बढ़ती रहे।

 

 

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