पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम सीटों पर मतगणना के दौरान BJP उम्मीदवारों की बढ़त चर्चा में रही। इन सीटों के आंकड़ों के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) का मुस्लिम मतदाताओं को लेकर दिया गया बयान भी सुर्खियों में आ गया। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से लोगों के साथ दोस्ती का रिश्ता बनाने की कोशिश की गई है। रेजीनगर में मुस्लिम आबादी की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण यहां के चुनावी आंकड़ों पर खास नजर रखी जा रही थी।
रेजीनगर में शाखारव सरकार को मिली बड़ी बढ़त
रेजीनगर सीट पर सात राउंड की गिनती के बाद BJP उम्मीदवार शाखारव सरकार को 61,386 वोट मिले थे। वह हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद से 37,506 वोट आगे चल रहे थे, जिन्हें 23,880 मत मिले। कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को 2,893 वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस के रबीउल आलम चौधरी को 2,862 मत प्राप्त हुए। वामपंथी उम्मीदवार सैयद असद अली को 1,573 वोट मिले। वहीं, टीएमसी से अलग हुए गुट के उम्मीदवार सफीउज्जमान शेख को 932 वोट मिले थे। इस सीट पर कुल 15 राउंड की मतगणना निर्धारित थी।
नंदीग्राम में भी BJP उम्मीदवार आगे
नंदीग्राम सीट पर 15 में से 12 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद BJP उम्मीदवार हासिरानी रथ को 1,32,052 वोट मिले थे। वह कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान से 97,522 वोटों के अंतर से आगे थीं। मिलन प्रधान को 34,530 वोट प्राप्त हुए थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वामपंथी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर थे। इसके बाद एआईएसएफ और तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के उम्मीदवारों का स्थान था। इन आंकड़ों के बीच दोनों सीटों की मतगणना और मतदाताओं के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई।
मुस्लिम मतदाताओं से शुभेंदु अधिकारी ने क्या अपील की थी?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) ने इससे पहले नंदीग्राम में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से BJP के साथ संबंध बेहतर बनाने की अपील की थी। उन्होंने मुस्लिम भाइयों और बहनों से कहा था कि वे उनसे दूरी न बनाएं और आपसी तालमेल बढ़ाने के मौके का लाभ उठाएं। उन्होंने 6 अक्टूबर को BJP उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होने की अपील भी की थी। इससे पहले अधिकारी ने मुस्लिम समुदाय के लिए इसे परीक्षा की घड़ी बताया था। अब मतगणना के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी ओर से दोस्ती कायम करने का प्रयास किया गया है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से सभी मुस्लिम मतदाताओं के मतदान व्यवहार के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
