Monday, February 2, 2026
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‘क्या आप मुझसे शादी करेंगे?’ पाकिस्तान में अटल जी से पूछा गया था चौंकाने वाला सवाल, तब क्या दिया रह जवाब

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आज 101वीं जन्म जयंती है। इस अवसर पर पूरे देश में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है और उनकी यादों को फिर से याद किया जा रहा है। अटल जी न सिर्फ एक मजबूत नेता थे, बल्कि अपने अलग अंदाज़, गहरी सोच और बेहतरीन हास्यबोध के लिए भी जाने जाते थे। उनकी राजनीति में विचारों की गंभीरता थी, लेकिन व्यवहार में सहजता और मानवीयता साफ झलकती थी। यही वजह है कि आज भी उनके किस्से लोगों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं।

वाजपेयी जी का जन्म 1924 में ग्वालियर में हुआ था और उनकी जयंती को सरकार सुशासन दिवस के रूप में मनाती है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान अटल जी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने वहां मौजूद लोगों को मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया और एक बार फिर साबित कर दिया कि अटल जी का जवाब देने का अंदाज़ कितना खास था।

जब पाकिस्तान दौरे में महिला ने पूछा शादी का सवाल

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में बताया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री रहते हुए पाकिस्तान के दौरे पर गए थे, तब उनके भाषण से वहां मौजूद लोग काफी प्रभावित हुए थे। उसी दौरान एक महिला ने उनसे मजाकिया लेकिन चौंकाने वाला सवाल पूछ लिया। महिला ने कहा, “क्या आप मुझसे शादी करेंगे और बदले में कश्मीर हमें दे देंगे?”

यह सवाल सुनकर कुछ पल के लिए माहौल ठहर गया, लेकिन अटल जी ने बिना किसी झिझक और पूरी मुस्कान के साथ ऐसा जवाब दिया, जिसे आज भी लोग याद करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं तुमसे शादी करने को तैयार हूं, लेकिन मुझे दहेज में पूरा पाकिस्तान चाहिए।”

राजनाथ सिंह ने बताया कि अटल जी के इस जवाब के बाद पूरा हॉल तालियों और ठहाकों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि यह अटल बिहारी वाजपेयी के शानदार सेंस ऑफ ह्यूमर और आत्मविश्वास का बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें वह बेहद संवेदनशील मुद्दों पर भी संतुलन और मर्यादा बनाए रखते थे।

राजनीतिक विरोधियों पर भी नहीं लांघी मर्यादा की रेखा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अटल जी को याद करते हुए कहा कि उनके भाषणों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी हमला करते थे, तो शब्दों की गरिमा कभी नहीं तोड़ते थे। उन्होंने कहा कि अटल जी की भाषा में कटाक्ष होता था, लेकिन कटुता नहीं। उनके शब्दों में दृढ़ता होती थी, लेकिन अपमान नहीं।

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि आज की राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता बहुत कम देखने को मिलते हैं, जो असहमति को भी सम्मान के साथ रखते थे। संसद में उनके भाषण सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं होते थे, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को मजबूत करने वाले विचार होते थे। यही वजह है कि विरोधी दलों के नेता भी उनके प्रति सम्मान की भावना रखते थे।

हिमाचल का किस्सा और अटल जी की चुटीली भाषा

इसी कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में एक कार्यक्रम के दौरान, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मंच पर मौजूद थे, तब अटल जी ने बेहद हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा था कि वहां के मंत्री “भद्र” यानी सभ्य तो हैं, लेकिन “वीर” यानी बहादुर नहीं हैं।

यह बात सुनकर वहां मौजूद सभी लोग मुस्कुरा उठे, यहां तक कि वीरभद्र सिंह भी इस टिप्पणी पर हंस पड़े। राजनाथ सिंह ने कहा कि यही अटल बिहारी वाजपेयी की खासियत थी—वे कटाक्ष भी इस तरह करते थे कि सामने वाला बुरा मानने की बजाय मुस्कुरा देता था।

आज उनकी 101वीं जयंती पर ऐसे किस्से यह याद दिलाते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ एक प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि एक ऐसे नेता थे जिन्होंने राजनीति को संवेदना, शालीनता और संवाद की ताकत दी। उनका जीवन और विचार आज भी देश के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।

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