समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि मतदाता सूची से चार करोड़ वोट काटे गए हैं। अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में पूछा कि जब SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, तो मुख्यमंत्री को यह आंकड़ा कैसे पता चला। उन्होंने कहा कि बिना किसी आधिकारिक डेटा के इस तरह का दावा करना खुद इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग मिलकर मतदाता सूची में हेरफेर कर रहे हैं और इसका सीधा नुकसान विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी को पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
403 सीटों का गणित गिनाकर सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान को आधार बनाते हुए गणित भी जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर चार करोड़ वोट वाकई मतदाता सूची से हटाए गए हैं और इस आंकड़े को प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में बांटा जाए, तो हर सीट पर करीब 84 हजार वोट कम हो जाते हैं। सपा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि इतना बड़ा बदलाव बिना किसी बड़े प्रशासनिक आदेश या पारदर्शी प्रक्रिया के कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी सुधार या सामान्य प्रक्रिया नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक मंशा छिपी हुई है। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि हजारों मतदाताओं के नाम सिर्फ छोटी-छोटी स्पेलिंग गलतियों का हवाला देकर हटाए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने चुनाव आयोग की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आना संदेह को और मजबूत करता है।
SIR को NRC जैसा बताया, सामाजिक संतुलन बदलने का आरोप
सपा प्रमुख ने SIR प्रक्रिया की तुलना NRC से करते हुए कहा कि सरकार इसे एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। अखिलेश यादव का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी SIR के जरिए प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को अपने पक्ष में बदलना चाहती है। उन्होंने कहा कि जिन तबकों की आवाज पहले से कमजोर है, उन्हीं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। अखिलेश ने यह भी कहा कि यह पूरा मामला लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला है और चुनाव से पहले इस तरह की गतिविधियां गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की आवाज को दबाने और चुनावी मैदान को असमान बनाने के लिए जानबूझकर ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। सपा नेता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार और चुनाव आयोग ने पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो समाजवादी पार्टी सड़क से सदन तक इस मुद्दे को उठाएगी।
घोटाले, बुलडोजर राजनीति और जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरा
SIR और वोटर लिस्ट विवाद के साथ-साथ अखिलेश यादव ने सरकार पर कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के कोडीन कफ सिरप घोटाले का खुलासा हो चुका है, जिसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर कई अन्य राज्यों तक फैला हुआ है। पहले इस घोटाले को सौ करोड़ का बताया गया था, लेकिन अब आंकड़ा हजारों करोड़ तक पहुंच गया है और इसमें 700 से अधिक कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और जो पत्रकार इस घोटाले को उजागर कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा तक खतरे में है। बुलडोजर राजनीति पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि छोटे मामलों में बुलडोजर तुरंत चल जाता है, लेकिन इतने बड़े घोटालों में सरकार का बुलडोजर कहीं नजर नहीं आता। प्रदूषण, किसानों की खाद की समस्या, धान खरीद और MSP जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि जनता के असली सवालों से ध्यान भटकाने के लिए भावनात्मक नारों का सहारा लिया जा रहा है। अखिलेश ने साफ किया कि चुनाव नजदीक हैं और बीजेपी विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन समाजवादी पार्टी जनता के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी।
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