भारत में अब लोन लेना सिर्फ बड़े शहरों और अमीर वर्ग तक सीमित नहीं रह गया है। घर, गाड़ी, पढ़ाई, कारोबार या दूसरी जरूरतों के लिए बड़ी संख्या में लोग बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से कर्ज ले रहे हैं। TransUnion CIBIL की रिपोर्ट में मार्च 2017 से मार्च 2026 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक देश की करीब 75 फीसदी आबादी ने कम से कम एक बार औपचारिक तौर पर कर्ज लिया है। इसका मतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में लोग बैंकिंग और क्रेडिट सिस्टम से जुड़े हैं। छोटे शहरों और राज्यों में भी अब लोन की पहुंच पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है।
यूपी और बिहार में तेजी से बढ़ी क्रेडिट एक्टिविटी
रिपोर्ट में अलग-अलग राज्यों में कर्ज से जुड़ी गतिविधियों का आंकड़ा सामने आया है। इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में तेजी देखने को मिली है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार यूपी की हिस्सेदारी 2017 में 8 फीसदी थी, जो 2026 में बढ़कर 11 फीसदी हो गई। इसी तरह बिहार की हिस्सेदारी 3 फीसदी से बढ़कर 5 फीसदी पहुंच गई। मध्य प्रदेश में भी यह आंकड़ा 4 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी हो गया। इससे पता चलता है कि इन राज्यों में बैंकिंग और कर्ज की सुविधा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। अब लोगों की जरूरतों के साथ-साथ बैंकों और वित्तीय कंपनियों की पहुंच भी छोटे शहरों और नए बाजारों तक बढ़ रही है।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों की हिस्सेदारी घटी
कर्ज के मामले में लंबे समय से महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दूसरे बड़े राज्य आगे रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट के आंकड़ों में इन राज्यों की हिस्सेदारी में कमी भी दिखाई देती है। महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 2017 के 12 फीसदी से घटकर 2026 में 10 फीसदी हो गई। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 11 फीसदी से घटकर 9 फीसदी रहा। वहीं कर्नाटक 7 फीसदी, गुजरात 5 फीसदी, तेलंगाना 5 फीसदी और आंध्र प्रदेश 6 फीसदी पर रहा। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि देश का क्रेडिट बाजार अब कुछ बड़े राज्यों तक सीमित नहीं है। यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बढ़ती कर्ज की मांग इस बदलाव को दिखाती है।
नए ग्राहकों को जोड़ना बैंकों के लिए बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पहली बार कर्ज लेने वाले नए ग्राहकों की रफ्तार में अब पहले के मुकाबले कमी आई है। ऐसे में आने वाले समय में बैंकों और वित्तीय कंपनियों के सामने नए लोगों को क्रेडिट सिस्टम से जोड़ने की चुनौती होगी। दूसरी तरफ छोटे शहरों और राज्यों में बढ़ती लोन की मांग उनके लिए नया अवसर भी बन सकती है। यूपी और बिहार जैसे बड़े राज्यों में क्रेडिट गतिविधियों का बढ़ना यह दिखाता है कि देश में कर्ज की सुविधा तेजी से नए इलाकों तक पहुंच रही है। हालांकि लोन लेने वालों के लिए अपनी आय और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में कर्ज चुकाने का दबाव न बढ़े।
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