उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां कैली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में जांच के नाम पर एक ऐसी बड़ी लापरवाही देखने को मिली, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। अस्पताल ने एक पुरुष मरीज की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में महिला का गर्भाशय (Uterus) होने का दावा कर दिया। जब पीड़ित मरीज ने अपनी रिपोर्ट देखी, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। चौंकाने वाली बात यह है कि यह गड़बड़ी तब सामने आई है, जब खुद जिला अधिकारी (DM) के निर्देश पर पूरे जिले के अल्ट्रासाउंड केंद्रों की मजिस्ट्रियल जांच चल रही है। इस घटना ने क्षेत्र में हर तरफ चर्चा और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
लापरवाही की हद: बिना दस्तखत और मोहर के थमा दी रिपोर्ट
पीड़ित मरीज जब अपनी बीमारी की जांच कराने अस्पताल पहुंचा, तो उसे उम्मीद थी कि सही रिपोर्ट के आधार पर उसका इलाज होगा। लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने जल्दबाजी और घोर लापरवाही का परिचय देते हुए किसी महिला की रिपोर्ट का प्रारूप पुरुष मरीज की रिपोर्ट पर कॉपी-पेस्ट कर दिया। जब पीड़ित ने ध्यान से रिपोर्ट को पढ़ा, तो उसमें गर्भाशय की स्थिति का जिक्र था। इतना ही नहीं, जब इस रिपोर्ट की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि इस पर न तो जांच करने वाले मुख्य चिकित्सक के हस्ताक्षर थे और न ही अस्पताल की कोई आधिकारिक मोहर लगी थी। डिजिटल युग में इस तरह की कतरन और आधी-अधूरी रिपोर्ट सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने जैसी है। अगर कोई डॉक्टर इसी फर्जी रिपोर्ट के आधार पर मरीज का इलाज शुरू कर देता, तो उसकी जान पर बन आती।
विरोध करने पर दबंगई: शिकायतकर्ता को मिली जान से मारने की धमकी
जब इस गंभीर गड़बड़ी का पता पीड़ित को चला, तो वह न्याय और स्पष्टीकरण के लिए अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों और प्रबंधन के पास पहुंचा। लेकिन अपनी गलती सुधारने या माफी मांगने के बजाय, अस्पताल प्रशासन अपनी दबंगई पर उतर आया। पीड़ित का आरोप है कि शिकायत करने पर अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मियों ने उसके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया। बात यहीं नहीं रुकी, अस्पताल के लोगों ने पीड़ित को चुप रहने की हिदायत देते हुए मारपीट करने और जान से मारने की धमकी तक दे डाली। हालांकि, विवाद बढ़ता देख बाद में अस्पताल प्रबंधन ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए पीड़ित से कहा कि जिस कर्मचारी ने यह गलत रिपोर्ट तैयार की थी, उसकी सैलरी काट ली गई है। लेकिन पीड़ित इस गैर-जिम्मेदाराना जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने सीधे प्रशासन का दरवाजा खटखटाया।
प्रशासन सख्त: सीएमओ ने दिए जांच के आदेश, पीसीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन का आरोप
इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजीव निगम से लिखित शिकायत की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीएमओ ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया है। डॉ. राजीव निगम ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए सोमवार को एक विशेष टीम का गठन किया जा रहा है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह डॉक्टर हो या अस्पताल प्रबंधन, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर, क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और पीड़ित का कहना है कि जिले में पीसीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीकी) एक्ट की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बिना मोहर-साइन के चल रहे ये सेंटर केवल मोटी कमाई का जरिया बन चुके हैं, जिन पर अब परमानेंट ताला लगाने का समय आ गया है।
