पेपर लीक कानून पारित होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक इंटरव्यू में आंदोलन की आगे की दिशा और अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर खुलकर बात की। सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या अब CJP राजनीतिक दल बनेगी और क्या वह खुद चुनावी राजनीति में उतरेंगे। इस पर अभिजीत दीपके ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य कोई नई राजनीतिक पार्टी बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि CJP आगे भी एक सामाजिक समूह के रूप में छात्रों और युवाओं के मुद्दों को उठाती रहेगी। उनके अनुसार, आंदोलन का मकसद केवल सरकार पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय तक सुधार की मांग को जीवित रखना है।
एंटी-पेपर लीक कानून पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने संसद से पारित एंटी-पेपर लीक संशोधन कानून पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उनकी समझ के अनुसार यह कानून पेपर लीक रोकने की बजाय, घटना होने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर ज्यादा केंद्रित है। उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना चाहती है, तो उसे ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए जिससे पेपर लीक की घटनाएं ही न हों। उन्होंने कहा कि कानून में सजा और जुर्माना बढ़ाना एक कदम हो सकता है, लेकिन केवल इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत करना ज्यादा जरूरी है।
मुआवजा, शिक्षा मंत्री और आंदोलन पर रखी राय
इंटरव्यू के दौरान दीपके ने छात्र आंदोलन से जुड़ी अन्य मांगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन परिवारों को मुआवजा देने की मांग उठाई गई थी, उस पर अब तक पूरी तरह अमल नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और मंत्रालय में हुए बदलाव को वे आंदोलन के प्रभाव के रूप में देखते हैं। हालांकि, उन्होंने सरकार की नीतियों और कुछ नियुक्तियों पर सवाल भी उठाए। साथ ही उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से बातचीत की पहल हुई थी, लेकिन उनका मानना था कि केवल स्थानीय स्तर पर बातचीत से समाधान संभव नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि CJP का आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल के सहयोग से नहीं, बल्कि छात्रों और आम नागरिकों की भागीदारी से आगे बढ़ा।
भविष्य की रणनीति पर दिया बड़ा संकेत
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि CJP भविष्य में भी शिक्षा, युवाओं और रोजगार जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहेगी। उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया गया और उन्हें परेशान किया गया, तो आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि आंदोलन में शामिल अधिकांश लोग पहली बार किसी सार्वजनिक प्रदर्शन का हिस्सा बने थे, जिससे यह साबित होता है कि यह अभियान आम लोगों के सहयोग से आगे बढ़ा। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य चुनावी राजनीति में उतरना नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर जनजागरण और जवाबदेही की मांग को मजबूत करना है।
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