देश की राजनीति में इन दिनों एक अनोखा नाम तेजी से चर्चा में है — ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP। यह कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि व्यवस्था पर व्यंग्य करने वाला एक नया राजनीतिक आउटफिट है, जिसे अभिजीत डिपके नाम के युवक ने शुरू किया है। दिलचस्प बात यह है कि इस पार्टी की शुरुआत उसी दिन हुई, जब देश के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बनी। इसके बाद सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच गुस्सा और निराशा की बहस तेज हो गई। इसी माहौल में अभिजीत ने X प्लेटफॉर्म पर लोगों से “कॉकरोच जनता पार्टी” से जुड़ने की अपील की। देखते ही देखते यह नाम वायरल हो गया। अभिजीत का दावा है कि पार्टी बनने के महज दो दिनों में करीब 50 हजार लोग इससे जुड़ गए। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि यह कोई चुनाव लड़ने वाली पार्टी नहीं, बल्कि मौजूदा सिस्टम और राजनीति पर कटाक्ष करने का तरीका है। पार्टी खुद को धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, समाजवादी और जाति-विरोधी संगठन बताती है।
कौन हैं अभिजीत डिपके और क्यों बनाई कॉकरोच जनता पार्टी?
कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत डिपके अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई कर रहे हैं। वह पहले आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम के साथ भी वॉलंटियर के तौर पर काम कर चुके हैं। अभिजीत का कहना है कि आज का युवा खुद को सिस्टम से कटा हुआ महसूस कर रहा है। उनकी नजर में बेरोजगारी, अवसरों की कमी और लगातार बढ़ती निराशा ने युवाओं को भीतर से तोड़ दिया है। इसी भावना को दिखाने के लिए उन्होंने ‘कॉकरोच’ शब्द को प्रतीक बनाया। अभिजीत के मुताबिक कॉकरोच ऐसा जीव है जो हर मुश्किल परिस्थिति में खुद को ढाल लेता है और जिंदा रहता है। उनका कहना है कि अगर व्यवस्था युवाओं को बेकार, आलसी या परजीवी समझती है, तो युवा उसी पहचान को व्यंग्य के रूप में अपनाकर जवाब देंगे। पार्टी में शामिल होने के लिए भी मजाकिया अंदाज में कुछ “योग्यताएं” रखी गई हैं, जैसे बेरोजगार होना, ऑनलाइन एक्टिव रहना और सिस्टम के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने की क्षमता होना। यही वजह है कि यह संगठन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मैनिफेस्टो के 5 वादों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
कॉकरोच जनता पार्टी का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा उसका 5 पॉइंट मैनिफेस्टो है। इस मैनिफेस्टो में कई ऐसे वादे किए गए हैं, जो सीधे राजनीति, चुनाव व्यवस्था और मीडिया पर सवाल खड़े करते हैं। पार्टी का कहना है कि अगर कभी वह सत्ता में आई तो रिटायरमेंट के बाद किसी भी मुख्य न्यायाधीश को राज्यसभा जैसे पद नहीं दिए जाएंगे। इसके अलावा अगर किसी नागरिक का वैध वोट हटाया जाता है, तो संबंधित चुनाव अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महिलाओं को संसद और कैबिनेट में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की बात भी इस मैनिफेस्टो में शामिल है। पार्टी ने बड़े कॉरपोरेट मीडिया चैनलों के लाइसेंस की जांच और दल बदलने वाले नेताओं पर 20 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने जैसी बातें भी कही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे युवाओं की भड़ास बता रहे हैं, तो कुछ इसे लोकतंत्र में बढ़ती बेचैनी का संकेत मान रहे हैं। यही वजह है कि इस व्यंग्यात्मक पार्टी का मैनिफेस्टो लगातार चर्चा में बना हुआ है।
‘कॉकरोच’ के पीछे छिपा युवाओं का गुस्सा और संदेश
अभिजीत डिपके का कहना है कि यह पूरी पहल सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि युवाओं की मानसिक स्थिति को दिखाने की कोशिश है। उनका मानना है कि देश का बड़ा युवा वर्ग खुद को अनसुना महसूस कर रहा है। नौकरी की कमी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक बहसों में युवाओं की वास्तविक समस्याओं के गायब होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर हजारों लोग इस पार्टी के नाम और उसके संदेश से खुद को जोड़ रहे हैं। पार्टी की टैगलाइन “आलसी और बेरोजगारों की आवाज” भी इसी नाराजगी को दर्शाती है। अभिजीत का कहना है कि उनकी विचारधारा गांधी, आंबेडकर और नेहरू जैसे नेताओं के लोकतांत्रिक विचारों से प्रेरित है। हालांकि उन्होंने बार-बार यह भी स्पष्ट किया है कि CJP एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक मंच है और इसका मकसद चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल उठाना है। लेकिन जिस तरह यह नाम सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है, उसने यह जरूर दिखा दिया है कि युवाओं के भीतर व्यवस्था को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
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