Sunday, February 1, 2026
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ममता कैसे बनी मौत की वजह? मां ने ली दो मासूमों की जान, फिर खुद खत्म करने चली…

भीलवाड़ा के मानपुरा में दिल दहला देने वाली घटना, जहां मां ने अपने दो मासूम बच्चों की हत्या कर दी और फिर आत्महत्या की कोशिश की।

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राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से सामने आई यह घटना किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है। मांडलगढ़ थाना क्षेत्र के मानपुरा कस्बे में रविवार को जो हुआ, उसने इंसानियत और ममता जैसे शब्दों को कठघरे में खड़ा कर दिया। यहां एक मां ही अपने दो मासूम बच्चों की काल बन गई। घरेलू चारदीवारी के भीतर हुई यह खौफनाक वारदात अब पूरे इलाके में चर्चा और गहरे सदमे का कारण बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार, मानपुरा निवासी संजू देवी तेली ने अपने ही 8 वर्षीय बेटे भेरूलाल और 10 वर्षीय बेटी नेहा की बेरहमी से हत्या कर दी। बच्चों की मौत के बाद महिला ने खुद भी फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। हालांकि समय रहते परिजनों और ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ गई, जिससे उसकी जान तो बच गई, लेकिन दो मासूम हमेशा के लिए दुनिया से चले गए।

घर के अंदर क्या हुआ? सवालों के घेरे में मां का खौफनाक कदम

घटना के बाद पूरे गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है। आखिर एक मां अपने बच्चों के साथ ऐसा कैसे कर सकती है? शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वारदात सुबह के समय घर के अंदर हुई। जब काफी देर तक घर से कोई हलचल नहीं हुई तो आसपास के लोगों को शक हुआ। दरवाजा खोलने पर अंदर का मंजर देखकर हर कोई सन्न रह गया।

दोनों बच्चों के शव घर में पड़े थे, जबकि महिला फांसी के फंदे से लटकी हुई थी। ग्रामीणों ने तुरंत उसे नीचे उतारा और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के अनुसार, महिला की हालत बेहद गंभीर थी, इसलिए पहले उसे मांडलगढ़ अस्पताल और फिर भीलवाड़ा रेफर किया गया। फिलहाल वह पुलिस निगरानी में इलाजरत है और उसकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। इस दर्दनाक घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि घरेलू जीवन के अंदर चल रहे तनाव और मानसिक दबाव किस हद तक इंसान को अमानवीय बना सकते हैं।

पुलिस और FSL की जांच, हर एंगल से खंगाला जा रहा मामला

घटना की सूचना मिलते ही मांडलगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को संभाला। वारदात की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी बाबूलाल बिश्नोई और थाना प्रभारी घनश्याम मीणा भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने घर का गहन निरीक्षण किया और ग्रामीणों व परिजनों से पूछताछ की।
दोनों मासूम बच्चों के शवों को मांडलगढ़ के राजकीय अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। पोस्टमार्टम के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। बच्चों के शव देखकर कई लोग फूट-फूटकर रो पड़े।

मामले की तह तक जाने के लिए एफएसएल टीम को भी बुलाया गया। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से अहम साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस घरेलू विवाद, मानसिक तनाव, पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस महिला के होश में आने और बयान दर्ज होने का इंतजार कर रही है।

मानसिक तनाव या अनदेखा सच? समाज के सामने खड़े हुए बड़े सवाल

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि संजू देवी लंबे समय से मानसिक तनाव से गुजर रही थी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि महिला के बयान के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। क्या घरेलू दबाव, आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी ऐसे खौफनाक कदमों की वजह बन रही है?

दो मासूम बच्चों की असमय मौत ने पूरे भीलवाड़ा जिले को गहरे शोक में डुबो दिया है। गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर चेहरा सवालों से भरा है। मांडलगढ़ पुलिस का कहना है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और जल्द ही इस दर्दनाक हकीकत के पीछे छिपे कारणों से पर्दा उठाया जाएगा।

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