बिहार की राजनीति में मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। नौ हत्याओं से जुड़े अपने बयान को लेकर विवाद में घिरे अनंत सिंह के खिलाफ अब आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ है। जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में चुनाव प्रचार करना उन्हें भारी पड़ता नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, अनंत सिंह और अनुज सिंह के खिलाफ बाढ़ और मोकामा थानों में कुल तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। अब इस कार्रवाई के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या चुनाव प्रचार के दौरान नियमों की अनदेखी से उनकी राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ेंगी?
रोड शो में तय सीमा से ज्यादा गाड़ियों के इस्तेमाल का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, बाढ़ में अनंत सिंह के रोड शो और जन अधिकार यात्रा के लिए प्रशासन ने केवल 10 गाड़ियों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान तय सीमा से ज्यादा वाहन लगाए गए। इसके अलावा, जेसीबी मशीनों के जरिए फूल बरसाने की भी बात सामने आई है। इसी मामले में आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की गई। अनंत सिंह के एक रिश्तेदार का नाम भी दर्ज मामले में शामिल बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा। फिलहाल तीन एफआईआर दर्ज होने से चुनावी माहौल में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
अपनी पार्टी के उम्मीदवार को छोड़ अनुज सिंह का कर रहे प्रचार
अनंत सिंह इस समय पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव को लेकर अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। वह जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में लगातार सभाएं और रोड शो कर रहे हैं। उनके इस कदम को जेडीयू के भीतर असहज स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। अनंत सिंह का कहना है कि अनुज सिंह का समर्थन करना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ विश्वासघात नहीं है। दूसरी ओर, पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने से राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद इस चुनाव में अनंत सिंह की भूमिका और उनके प्रचार अभियान पर सबकी नजर रहेगी।
नौ हत्याओं वाले बयान से पहले ही विवादों में थे विधायक
एफआईआर से पहले अनंत सिंह अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में आए थे। उन्होंने दावा किया था कि नीतीश कुमार के साथ रहते हुए उन्होंने नौ लोगों की हत्या करवाने की बात कही थी। बयान पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सफाई दी कि उनकी बात को गलत समझा गया। उनके मुताबिक, वह यह कहना चाहते थे कि लालू यादव की पार्टी के शासनकाल में उनके नौ लोगों की हत्या हुई थी और इसकी वजह नीतीश कुमार से उनकी नजदीकी थी। इस सफाई के बावजूद बयान को लेकर राजनीतिक बहस जारी रही। अब आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामले ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में जांच और चुनावी घटनाक्रम से साफ होगा कि इस विवाद का राजनीतिक असर कितना पड़ता है।
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