पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के राजाबाजार इलाके में शुक्रवार को सड़क पर नमाज अदा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया और पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं है, क्योंकि इससे यातायात प्रभावित होता है और कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा रहता है। इसी बीच इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। अलग-अलग दलों के नेता इस मुद्दे पर बयान दे रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए, जबकि दूसरी तरफ कुछ लोग सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल पर सवाल उठा रहे हैं। राजाबाजार की घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
AIMIM के वारिस पठान ने उठाए बराबरी के अधिकार का सवाल
इस विवाद के बीच AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि कोई भी मुसलमान खुशी से सड़क पर नमाज नहीं पढ़ता, बल्कि यह उसकी मजबूरी होती है क्योंकि मस्जिदों में जगह कम पड़ जाती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई मुसलमान शुक्रवार के दिन कुछ मिनटों के लिए सड़क पर नमाज पढ़ लेता है तो इससे लोगों को इतनी परेशानी क्यों होती है। वारिस पठान ने यह भी कहा कि देश में हर धर्म के लोगों को अपने तरीके से पूजा-पाठ करने का अधिकार है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार ट्रेन, एयरपोर्ट या अन्य सार्वजनिक जगहों पर दूसरे धर्मों के लोग भी धार्मिक गतिविधियां करते दिखाई देते हैं, लेकिन उन पर इस तरह का विवाद नहीं खड़ा किया जाता। उनके मुताबिक अगर मुसलमान नमाज पढ़ते हैं तो तुरंत कार्रवाई की बात होने लगती है, जो संविधान में दिए गए बराबरी के अधिकार की भावना के खिलाफ है। पठान के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है।
प्रशासन की सख्ती और इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
राजाबाजार में शुक्रवार को नमाज के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने सड़क खाली कराने की कोशिश की। स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आईं। इसके बाद पुलिस और केंद्रीय बलों की अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी। प्रशासन का कहना है कि किसी भी धर्म को निशाना नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि नियम सभी के लिए बराबर हैं। अधिकारियों के अनुसार सड़क जाम होने से आम लोगों को परेशानी होती है और आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। इसी कारण सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति जरूरी होती है। पुलिस ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है ताकि दोबारा किसी तरह का तनाव पैदा न हो। वहीं स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों का कहना है कि धार्मिक आस्था का सम्मान होना चाहिए, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था भी बनी रहनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कोलकाता में प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
राजनीतिक बयानबाजी से और गरमाया माहौल
राजाबाजार की घटना अब केवल स्थानीय विवाद नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ संगठनों ने सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त नियम लागू करने की मांग की है। दूसरी ओर AIMIM और कुछ अन्य नेताओं का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मुद्दे अक्सर चुनावी माहौल में ज्यादा चर्चा में आ जाते हैं और राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक के हिसाब से बयान देते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इसे धार्मिक भेदभाव बता रहे हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की कोशिश है कि इलाके में शांति बनी रहे और किसी तरह की अफवाह या तनाव फैलने न पाए। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में और ज्यादा गर्मा सकता है।
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