देश जब 15 अगस्त को स्वतंत्रता का जश्न मना रहा था, तब कर्नाटक के एक घने जंगल में हुई एक खूनी मुठभेड़ ने दक्षिण भारत की राजनीति में भूचाल ला दिया। कावेरी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में वन विभाग के रेंजरों और कथित शिकारियों के बीच हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई। मारे गए ये लोग तमिलनाडु के नागरिक बताए जा रहे हैं, जिसके बाद से दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह वास्तव में आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी या फिर कोई सोची-समीरी घटना?
जोसेफ विजय का आक्रामक रुख: ‘यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि खुली हत्या है’
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय इस घटना के सामने आने के बाद बेहद गुस्से में नजर आए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़े शब्दों में बयान जारी करते हुए कर्नाटक वन विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि एंथोनी सामी, जॉन रोज पीटर और कुमार नामक इन तीनों नागरिकों की मौत कोई आम मुठभेड़ नहीं, बल्कि सीधी और खुली हत्या है। मुख्यमंत्री विजय ने कर्नाटक सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, साथ ही पीड़ित गरीब परिवारों को तुरंत उचित मुआवजा और हरसंभव सरकारी सहायता प्रदान की जाए।
कर्नाटक सरकार की सफाई और डीके शिवकुमार का पक्ष
दूसरी ओर, कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर हलचल तेज हो गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें सुबह ही पूरी रिपोर्ट दे दी थी। उनके मुताबिक, मौके से शिकारियों की बंदूकें और जंगली जानवरों के मांस से भरे हुए बैग बरामद हुए हैं, और कथित तौर पर उन लोगों ने पहले वन कर्मियों पर फायरिंग की थी। इसके बावजूद, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार पहले ही इस पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे चुकी है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पर भी विचार चल रहा है।
विपक्ष का हमला और राजनीतिक नफे-नुकसान का गणित
इस पूरे विवाद में अब राजनीतिक दल भी कूद पड़े हैं। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता अशोक ने वन विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि आत्मरक्षा भी करनी थी, तो गोली सीधा सीने पर मारने के बजाय पैरों पर चलाई जा सकती थी। बीजेपी ने इस घटना की न्यायिक जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। चूंकि मारे गए सभी व्यक्ति पड़ोसी राज्य तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे, इसलिए इस संवेदनशील मामले को लेकर दोनों राज्यों के स्थानीय राजनीतिक समीकरण गरमा गए हैं और आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है।
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