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“जिस शहर को भारत में मिलाया, वहीं कट गया वोट!” मुर्शिदाबाद के नवाब खानदान की कहानी ने उठाए बड़े सवाल

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में नवाब परिवार के 120 सदस्यों के वोट कटने का मामला चर्चा में, आजादी से जुड़े इतिहास और मौजूदा विवाद ने खड़े किए कई सवाल।

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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां नवाब खानदान के करीब 120 सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह वही परिवार है जिसने आजादी के समय इस क्षेत्र को भारत में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई थी। छोटे नवाब Syed Reza Ali Mirza और उनके बेटे Faheem Mirza का नाम भी सूची से गायब है। दिलचस्प बात यह है कि फहीम मिर्जा खुद एक पार्षद हैं और अपनी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं, लेकिन इस बार वोट नहीं डाल पाएंगे।

‘300 साल से यहीं हैं, फिर भी पहचान पर सवाल’

नवाब परिवार का कहना है कि उनका इतिहास भारत से जुड़ा रहा है और वे पिछले 300 सालों से इसी जमीन पर रह रहे हैं। छोटे नवाब ने बताया कि उनके दादा Wasif Ali Mirza ने 1947 के समय एक बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान जाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। उस समय मुर्शिदाबाद मुस्लिम बहुल इलाका था और कुछ समय के लिए पाकिस्तान का हिस्सा भी माना गया, लेकिन बाद में प्रयासों के जरिए इसे भारत में शामिल कराया गया। परिवार का कहना है कि उन्होंने हमेशा हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया है और आज भी सभी त्योहार मिलजुलकर मनाते हैं।

दस्तावेज देने के बावजूद नहीं जुड़ा नाम

फहीम मिर्जा ने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को सभी जरूरी दस्तावेज दिए, यहां तक कि अपने पिता की पुरानी मार्कशीट और अन्य प्रमाण भी जमा किए, लेकिन फिर भी उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक, उनके वार्ड में कुल 386 वोट कटे हैं, जिनमें से 120 नवाब परिवार के ही हैं। उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया है और कहा है कि वे न तो बाहरी हैं और न ही किसी अन्य देश से आए हैं, बल्कि पूरी तरह से भारतीय नागरिक हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक सवालों के बीच बढ़ी चिंता

इस पूरे मामले ने प्रशासन और चुनावी प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। छोटे नवाब ने बताया कि वे Indira Gandhi के समय से लगातार वोट करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार उनका नाम सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने जिला प्रशासन से कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्हें यही जवाब मिला कि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के हाथ में है। इस घटना से न केवल नवाब परिवार बल्कि पूरे इलाके में चिंता का माहौल है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद क्या इन लोगों के वोट दोबारा बहाल किए जाएंगे या नहीं।

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