UP Rajya Sabha Election:उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही हलचल अब खत्म हो गई है। प्रदेश की सभी 10 सीटों पर मतदान की जरूरत ही नहीं पड़ी और सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए। इस चुनाव में BJP के आठ और समाजवादी पार्टी (सपा) के दो प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज हो गए थे। वहीं, नाम वापस लेने की अंतिम समय-सीमा समाप्त होने के बाद मुकाबले की संभावना भी खत्म हो गई। अब इस नतीजे को प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
राज्यसभा की 10 सीटों पर निर्विरोध चुने गए सभी उम्मीदवार
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की खाली हो रही 10 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी हो गई है। तय समय तक नाम वापस लेने की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। BJP ने आठ सीटों पर जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में दो सीटें गईं। इस तरह चुनाव में न तो मतदान की नौबत आई और न ही वोटों की गिनती की जरूरत पड़ी। राज्यसभा की इन सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होना था। निर्विरोध निर्वाचन से चुनावी प्रक्रिया बिना किसी सीधे मुकाबले के पूरी हो गई।
बीजेपी के इन आठ नेताओं को मिली राज्यसभा में जगह
BJP की ओर से धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार निर्विरोध चुने गए हैं। पार्टी ने इस बार अपने आठों उम्मीदवारों के रूप में नए चेहरों पर भरोसा जताया। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया। BJP के प्रत्याशियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। इस फैसले को संगठन में नए नेताओं को आगे लाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवारों ने भी दर्ज की जीत
समाजवादी पार्टी की ओर से प्रोफेसर राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। दोनों उम्मीदवारों के निर्वाचन के साथ सपा ने प्रदेश की 10 सीटों में से दो सीटें अपने नाम कर लीं। राम गोपाल यादव सपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं, जबकि धनराज परिमल नाथवानी का नाम भी इस चुनाव में चर्चा में रहा। दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने और नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया था।
BJP ने पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं पर लगाया दांव
इस चुनाव में BJP की रणनीति खास चर्चा में रही, क्योंकि पार्टी ने अपने मौजूदा आठ सदस्यों को दोबारा मौका देने के बजाय नए उम्मीदवार उतारे। इनमें महिला नेताओं के साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। राजनीतिक नजरिए से यह फैसला संगठन में नए चेहरों को आगे बढ़ाने और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश माना जा रहा है। दूसरी ओर, सपा ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजने में सफलता हासिल की। सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के बाद अब राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व नए सदस्यों के साथ आगे बढ़ेगा।
