उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के बिलारी क्षेत्र स्थित सतारन गांव में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। गांव के रहने वाले एक बेहद साधारण मजदूर परिवार का सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला बेटा अतुल अक्सर गली-मोहल्ले के आवारा कुत्तों से लगाव रखता था और उन्हें रोटी खिलाता था। लगभग दो महीने पहले, कुत्तों को खाना खिलाते वक्त एक कुत्ते का नाखून उसकी उंगली में लग गया था। बच्चे ने इसे एक मामूली खरोंच समझकर अनदेखा कर दिया और अपने परिवार में किसी को भी इस बात की भनक नहीं लगने दी। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस छोटी सी बात को वह भूल चुका था, वह उसके शरीर के भीतर धीरे-धीरे एक जानलेवा बीमारी का रूप ले रही थी।
कक्षा में बिगड़ी तबीयत और पानी देखकर दहशत
दो महीने तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन शनिवार को जब अतुल रोज़ की तरह अपने स्कूल पहुंचा, तो अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसे सांस लेने में भारी तकलीफ और घुटन महसूस होने लगी। जब स्कूल की शिक्षामित्र ने छात्र को असहज देखा और उसे राहत देने के लिए पानी पीने को दिया, तो बच्चा अचानक पानी देखते ही बेहद डर गया और अजीब हरकतें करने लगा। पानी से लगने वाले इस खौफ (हाइड्रोफोबिया) को देखकर स्कूल में हड़कंप मच गया। तुरंत परिजनों को सूचना दी गई और उसे पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया। वहां पहुंचते ही बच्चा अस्पताल के लोहे के गेट को पकड़कर जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगा, जिससे वहां मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
अस्पताल से दिल्ली तक की जद्दोजहद और दुखद अंत
अतुल की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने समझ लिया कि उसे रेबीज का गंभीर संक्रमण हो चुका है। उसकी गिरती हालत के कारण डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत जिला अस्पताल और फिर शनिवार शाम को ही दिल्ली के उच्च स्तरीय अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। मासूम न तो ठीक से सांस ले पा रहा था और न ही कुछ निगल पा रहा था। दिल्ली के अस्पताल में डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार सुबह उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस दुखद खबर के मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। एक मामूली खरोंच के कारण हंसते-खेलते बच्चे की जान चले जाने से पूरा गांव गहरे सदमे में है।
स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता और ग्रामीणों से अपील
इस दर्दनाक घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। सीएचसी के चिकित्साधिकारी ने बताया कि यदि बच्चे को समय रहते एंटी-रेबीज वैक्सीन लग जाती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। सोमवार को सतारन गांव में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम भेजी जा रही है, जो मृतक छात्र के परिजनों और उसके संपर्क में आए सभी लोगों को एहतियातन एंटी-रेबीज की खुराक देगी। इसके साथ ही, ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है ताकि लोग यह समझ सकें कि कुत्ता, बिल्ली या किसी जानवर के काटने, खरोंचने या नाखून लगने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर टीका लगवाना कितना आवश्यक है।
