मोदी सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित करने की तैयारी में है। इसी कड़ी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा का नाम बदलकर एक नई पहचान देने का प्रस्ताव सामने आया है। सरकार इसे आम लोगों के बीच ‘जी राम जी’ योजना के नाम से लोकप्रिय बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसका आधिकारिक नाम विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) रखा जा सकता है, जिसे संक्षेप में VB–जी राम जी योजना कहा जाएगा। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार इस बदलाव को कानूनी रूप देने के लिए लोकसभा में विधेयक लाने की तैयारी चल रही है। सरकार का मानना है कि बदलते समय और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण रोजगार योजना को नई सोच, नए उद्देश्य और नए ढांचे के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है। नाम परिवर्तन के साथ-साथ योजना की संरचना, काम के स्वरूप और रोजगार के दिनों में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है, जिससे इसे केवल रोजगार योजना नहीं बल्कि ग्रामीण विकास का मिशन बनाया जा सके।
125 दिन रोजगार की गारंटी
नए बिल के ड्राफ्ट के मुताबिक जी राम जी योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जो मौजूदा व्यवस्था से अधिक मानी जा रही है। सरकार का फोकस सिर्फ काम देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्रामीण इलाकों में आजीविका के स्थायी साधन विकसित हों। योजना का एक बड़ा उद्देश्य गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकना है। सरकार मानती है कि यदि गांव में ही पर्याप्त रोजगार, ढांचागत सुविधाएं और आय के अवसर उपलब्ध होंगे तो लोगों को मजबूरी में शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम तय किए जाएंगे, ताकि गांव आत्मनिर्भर बन सकें। खेती के पीक सीजन को ध्यान में रखते हुए श्रमशक्ति की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर होगा, जिससे कृषि कार्य प्रभावित न हों और किसानों को समय पर मजदूर मिल सकें।
किन कामों पर होगा जोर: जल संरक्षण से लेकर ग्रामीण ढांचे तक
जी राम जी योजना के तहत कराए जाने वाले कार्यों का दायरा भी व्यापक होगा। बिल के अनुसार सरकारी विभागों के कई विकास कार्य इसी स्कीम के तहत कराए जा सकते हैं। इसमें जल संरक्षण से जुड़े कार्य, जैसे तालाबों का निर्माण, जल संचयन संरचनाएं, नहरों की सफाई और भूजल स्तर सुधारने के प्रोजेक्ट शामिल होंगे। इसके अलावा ग्रामीण सड़कों, सामुदायिक भवनों, पंचायत स्तर के ढांचागत विकास और आजीविका से जुड़े मिशनों पर भी काम कराया जाएगा। सरकार इन कार्यों को पीएम-गति शक्ति योजना से जोड़ने पर भी विचार कर रही है, ताकि केंद्र और राज्य स्तर की परियोजनाओं में बेहतर तालमेल हो सके। इसका मकसद यह है कि ग्रामीण विकास के काम केवल अस्थायी रोजगार तक सीमित न रहें, बल्कि लंबे समय तक गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें और बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाएं।
AI, GPS और मोबाइल मॉनिटरिंग से पारदर्शिता पर फोकस
नई योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका आधुनिक तकनीक से जुड़ना माना जा रहा है। बिल के ड्राफ्ट में साफ किया गया है कि जी राम जी योजना के तहत होने वाले कामों की निगरानी के लिए जीपीएस और मोबाइल आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि काम वास्तविक रूप से जमीन पर हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही योजना की प्लानिंग, ऑडिटिंग और फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाएगा। AI आधारित सिस्टम के जरिए फर्जी जॉब कार्ड, गलत भुगतान और अनियमितताओं पर नजर रखी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। कुल मिलाकर जी राम जी योजना को मनरेगा का नया और तकनीक-सक्षम रूप माना जा रहा है, जो विकसित भारत 2047 के विजन के साथ ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
