Homeदेशअरावली पर टला संकट! केंद्र सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

अरावली पर टला संकट! केंद्र सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

अरावली पर्वतमाला पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है। नई माइनिंग लीज पर रोक, पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश, राजस्थान-हरियाणा-गुजरात पर असर और अरावली संरक्षण की पूरी कहानी पढ़ें।

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अरावली पर्वतमाला को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने साफ निर्देश दिए हैं कि जब तक नई गाइडलाइंस तैयार नहीं हो जातीं, तब तक अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की नई माइनिंग लीज जारी नहीं की जाएगी। इस फैसले को लेकर मंत्रालय ने राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के मुख्य सचिवों को औपचारिक पत्र भेजा है। अरावली पर्वतमाला देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और यह उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाती है। पिछले कुछ वर्षों में यहां अवैध और अनियंत्रित खनन को लेकर कई बार सवाल उठे हैं। सरकार के इस फैसले को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जहां पर्यावरण संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से ऊपर रखने का संदेश दिया गया है। नई लीज पर रोक का मतलब यह भी है कि अब तक लंबित कई प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में चले जाएंगे।

राजस्थान, हरियाणा और गुजरात पर सीधा असर

केंद्र सरकार के इस निर्देश का सबसे बड़ा असर उन राज्यों पर पड़ेगा, जहां अरावली का बड़ा हिस्सा फैला हुआ है। राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में अरावली क्षेत्र में खनन गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं। कई इलाकों में पत्थर, बजरी और अन्य खनिजों का बड़े पैमाने पर दोहन हुआ है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा बल्कि भूजल स्तर पर भी गंभीर असर पड़ा। अब नई माइनिंग लीज पर रोक लगने से इन राज्यों को अपनी नीतियों पर फिर से विचार करना होगा। राज्य सरकारों को केंद्र की नई गाइडलाइंस का इंतजार करना पड़ेगा, जिसके बाद ही आगे की प्रक्रिया तय हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अल्पकालिक रूप से आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन लंबे समय में यह पर्यावरण और स्थानीय आबादी के हित में साबित होगा।

अरावली क्यों है इतनी अहम: पर्यावरण से लेकर पानी तक जुड़ा है भविष्य

अरावली पर्वतमाला सिर्फ पहाड़ों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय संतुलन की रीढ़ मानी जाती है। यह पर्वतमाला थार रेगिस्तान के फैलाव को रोकने, बारिश के पानी को संचित करने और भूजल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अरावली के जंगल कई दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का घर हैं। खनन के कारण इन जंगलों का तेजी से नुकसान हुआ है, जिससे जैव विविधता पर खतरा बढ़ा है। पर्यावरणविद लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि अगर अरावली को नहीं बचाया गया तो आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में जल संकट और प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है। केंद्र सरकार का यह फैसला इसी चेतावनी को गंभीरता से लेने का संकेत देता है।

आगे क्या: नई गाइडलाइंस से तय होगा अरावली का भविष्य

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार अरावली के लिए कैसी नई गाइडलाइंस तैयार करती है। मंत्रालय के पत्र में साफ कहा गया है कि नई दिशा-निर्देश आने तक कोई भी नई माइनिंग लीज नहीं दी जाएगी। माना जा रहा है कि नई गाइडलाइंस में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को और सख्त किया जा सकता है, साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह से ‘नो-माइनिंग जोन’ घोषित किया जा सकता है। इससे अरावली को कानूनी रूप से ज्यादा मजबूत सुरक्षा मिल सकती है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि यह सिर्फ कागजी आदेश न रहकर जमीन पर भी लागू होगा। अगर ऐसा होता है, तो अरावली पर्वतमाला आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सकेगी और देश को एक बड़ी पर्यावरणीय राहत मिलेगी।

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