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बेटे ने थार से पांच लोगों को कुचला तो विधायक बाप ने पुलिस को दे दी खुला धमकी, कहा – ‘दम हो तो…’

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में थार से 5 लोगों को कुचलने के मामले में विधायक और उनके बेटे पर आरोपों के बीच विवाद बढ़ गया है। जानिए पूरा घटनाक्रम और ताजा अपडेट।

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Thar Accident Case: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में हुआ एक सड़क हादसा अब महज दुर्घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह मामला सत्ता और कानून के बीच टकराव की तरह सामने आ रहा है। करेरा क्षेत्र में 16 अप्रैल की सुबह एक तेज रफ्तार थार वाहन द्वारा पांच लोगों को टक्कर मारने का आरोप है, जिससे सभी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना में जिस युवक का नाम सामने आया, वह एक सत्तारूढ़ दल के विधायक का बेटा बताया जा रहा है। शुरुआत में यह मामला सामान्य सड़क हादसे की तरह देखा गया, लेकिन जैसे-जैसे घटनाक्रम आगे बढ़ा, इसने राजनीतिक रंग ले लिया। अब यह मुद्दा प्रशासनिक निष्पक्षता और प्रभावशाली लोगों के दबाव जैसे सवालों को भी सामने ला रहा है।

विधायक के बयान से बढ़ा विवाद

हादसे के तुरंत बाद संबंधित विधायक ने सोशल मीडिया पर एक संतुलित बयान देते हुए कहा था कि “जनता सर्वोपरि है” और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। उस वक्त यह बयान जिम्मेदारी दर्शाता हुआ नजर आया था। लेकिन कुछ ही दिनों में हालात बदल गए और विधायक का रुख काफी आक्रामक हो गया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और जांच प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जताई। उनके बयान में साफ तौर पर चेतावनी का लहजा दिखाई दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर जांच में पक्षपात या गलत आरोप लगाए गए तो वे इसका जवाब देंगे। इस बयान के बाद मामला और ज्यादा गरमा गया है।

चर्चा में आरोपी बेटे का रवैया 

इस पूरे मामले में विधायक के बेटे का रवैया भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आरोप है कि घटना के बाद वह उसी वाहन से थाने पहुंचा, जो बिना नंबर प्लेट, काली फिल्म और हूटर जैसे नियमों के उल्लंघन के साथ चल रहा था। पुलिस ने वाहन का चालान तो काटा, लेकिन इसके बावजूद युवक के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं दिखा। पूछताछ के दौरान उसने यह तर्क दिया कि उसने हॉर्न और सायरन बजाया था, लेकिन सामने वाले नहीं हटे, इसलिए गाड़ी आगे बढ़ाई। वहीं पुलिस जांच में यह सामने आया कि वाहन पर लगे उपकरण मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के खिलाफ थे। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

 पीड़ितों के आरोप और पुराना रिकॉर्ड

घटना में घायल लोगों का कहना है कि हादसे के बाद उन्हें किसी भी तरह की मदद नहीं मिली और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने उनकी सुध ली। इससे नाराजगी और बढ़ी है। वहीं आरोपी युवक का पुराना रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में आ गया है, जिसमें पहले भी विवाद और कानूनी मामलों की बात सामने आई है। दूसरी ओर विधायक ने अपनी सफाई में कहा है कि उन्होंने खुद पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा और बेटे को पूछताछ के लिए भेजा। लेकिन जमीनी हकीकत और पीड़ितों के आरोप इस दावे से मेल नहीं खाते। अब यह मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता, कानून के पालन और राजनीतिक प्रभाव जैसे बड़े मुद्दों को सामने ला रहा है।

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