तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों एक ऐसा तूफान आया हुआ है, जिसने विधानसभा से लेकर सोशल मीडिया तक सबको हिलाकर रख दिया है। तमिलनाडु विधानसभा के भीतर जो नजारा देखने को मिला, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। अभिनेता से मुख्यमंत्री बने सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) का सदन में पहला बड़ा संबोधन सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि यह हाई-वोल्टेज ड्रामे और तीखे तंज का एक ऐसा कॉकटेल साबित हुआ जिसने विपक्षी खेमे की रातों की नींद उड़ा दी। भाषण के दौरान जैसे ही विजय ने सत्तारूढ़ दल के कथित प्रशासनिक ढुलमुलपन और भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाना शुरू किया, वैसे ही पूरा सदन नारेबाजी और हंगामे की गूंज से भर उठा। लेकिन असली सस्पेंस और कौतूहल का क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने अपना भाषण समाप्त किया। उन्होंने बहुत ही शालीनता से स्पीकर से अनुमति मांगी और फिर अचानक अपने पुराने और बेहद लोकप्रिय फिल्मी अंदाज में हाथ का एक खास इशारा किया। इस एक जेस्चर ने सदन में मौजूद विपक्षी विधायकों को इस कदर नाराज कर दिया कि डीएमके (DMK) के सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए (वॉकआउट कर गए)। वहीं दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष के विधायकों और समर्थकों ने इतनी जोर-जोर से तालियां बजानी शुरू कर दीं कि पूरा हॉल गूंज उठा। इस पूरे वाकये का वीडियो देखते ही देखते इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया है और हर कोई यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर इस इशारे के पीछे की असली कहानी क्या है।
क्या स्टालिन की नकल थी वह हरकत? इंटरनेट पर छिड़ी ‘जेस्चर’ की जंग
राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता के बीच इस समय सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या मुख्यमंत्री विजय ने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की नकल यानी मिमिक्री की थी? दरअसल, कुछ समय पहले कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे की संवेदनशील बातचीत के बाद जब एम.के. स्टालिन डीएमके मुख्यालय से बाहर आ रहे थे, तब उन्होंने मीडिया कर्मियों को देखकर हवा में हाथ लहराते हुए एक बेहद खास इशारा किया था। उस वक्त सोशल मीडिया पर उस वीडियो को ‘सब कुछ तय हो गया’ या ‘मामला खत्म’ के प्रतीक के रूप में जमकर शेयर किया गया था। हालांकि बाद में खुद स्टालिन ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि वह महज एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी क्योंकि पत्रकार लगातार पूछ रहे थे कि बैठक खत्म हुई या नहीं। लेकिन विधानसभा के भीतर विजय ने ठीक उसी अंदाज में हाथ लहराकर जिस तरह से अपने भाषण का समापन किया, उसने उस पुरानी बहस को दोबारा जिंदा कर दिया है। लोगों का मानना है कि विजय ने इस मिमिक्री के जरिए विपक्षी गठबंधन पर करारा तंज कसा है। राजनीति में संकेतों का बहुत बड़ा महत्व होता है, और विजय का यह सिनेमाई जेस्चर यह साफ तौर पर बयां कर रहा था कि वे पारंपरिक राजनीति के दिग्गजों को उन्हीं की भाषा में और बेहद आक्रामक अंदाज में जवाब देने की पूरी तैयारी के साथ सत्ता के शीर्ष पर बैठे हैं।
अभिनेता की पार्टी कहने वालों को करारा जवाब: चुनावी आंकड़ों से चौंकाया
अपने इस ऐतिहासिक और आक्रामक संबोधन में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उन तमाम आलोचकों के मुंह पर ताला लगा दिया जो उन्हें महज एक ‘फिल्मी सितारा’ या उनकी पार्टी को ‘सिनेमाई ग्लैमर की बैसाखी पर टिकी ताकत’ कहकर खारिज करते थे। विजय ने बेहद कड़े और नपे-तुले शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी की जड़ें जनता के बीच बहुत गहरी हैं। उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण अंतर को रेखांकित करते हुए कहा, ‘दुनिया में ज्यादातर लोग पहले एक राजनीतिक दल का गठन करते हैं और फिर वोट मांगने के लिए जनता के पास जाते हैं। लेकिन हमने इस स्थापित ढर्रे को पूरी तरह से बदल दिया; हम पहले कई सालों तक जनता के सुख-दुख में शामिल हुए, उनके लिए जमीन पर काम किया और उसके बाद एक राजनीतिक शक्ति के रूप में खुद को स्थापित किया।’ आलोचकों पर निशाना साधते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव के उन जादुई आंकड़ों को सदन के पटल पर रखा जिसने राज्य की राजनीति का भूगोल बदल दिया। विजय ने याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने बिना किसी अन्य दल के साथ गठबंधन किए, पूरी तरह से अकेले चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में राज्य की जनता ने उनकी नीतियों पर विश्वास जताते हुए उन्हें 35 प्रतिशत का भारी-भरकम वोट शेयर दिया, जो कि लगभग 1.72 करोड़ वोटों के बराबर है। इतनी बड़ी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने के कारण ही आज वे पूरे आत्मसम्मान के साथ सरकार का संचालन कर रहे हैं।
पेरियार, अंबेडकर और कामराज का त्रिकोण: क्या है विजय का नया राजनीतिक दर्शन?
भाषण के अंतिम हिस्से में मुख्यमंत्री विजय ने अपनी पार्टी की वैचारिक दिशा और राजनीतिक दर्शन को बहुत ही स्पष्टता के साथ देश के सामने रखा। उन्होंने द्रविड़ आंदोलन के पुरोधा माने जाने वाले पेरियार ई.वी. रामासामी का जिक्र करते हुए एक बहुत ही संतुलित और परिपक्व बात कही। विजय ने स्पष्ट किया कि पेरियार की नास्तिकता या धार्मिक आस्था को पूरी तरह से नकारने वाले विचार से भले ही उनकी पार्टी पूरी तरह सहमत न हो, लेकिन सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और रूढ़िवादिता के खिलाफ पेरियार के जो व्यापक सिद्धांत थे, उन्हें उनकी सरकार ने पूरी तरह से आत्मसात किया है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के समान अवसर और सामाजिक समरसता के विचारों को अपनी राजनीति की आत्मा बताया। प्रशासन की ईमानदारी को लेकर उन्होंने महान नेता कामराज के मॉडल को अपनी सरकार की आधारशिला घोषित किया। डीएमके पर तीखा हमला जारी रखते हुए विजय ने भावुक अंदाज में कहा कि यह सरकार किसी खास परिवार या संभ्रांत वर्ग की नहीं, बल्कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की सरकार है। उन्होंने अतीत का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार से पूर्व में सी.एन. अन्नादुरई (अन्ना) के दौर में आम जनता की सरकार चलती थी और बाद में एमजीआर (MGR) के समय बहुत ही साधारण लोगों को सत्ता में अपनी भागीदारी महसूस होती थी, ठीक उसी तरह विजय के नेतृत्व वाली यह वर्तमान सरकार भी सबसे साधारण और आम लोगों के हक की रक्षा करने वाली सरकार है, और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
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