पाकिस्तान और पीओके में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े बताए जा रहे हमजा बुरहान की मौत के बाद उसका जनाज़ा चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कई बड़े आतंकी सरगना खुलेआम दिखाई दिए, जिसके बाद पाकिस्तान की भूमिका पर नए सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में भारी संख्या में हथियारबंद लोग नजर आए और पूरे इलाके में कड़ी सुरक्षा दिखाई दी। बताया जा रहा है कि हमजा बुरहान को इस्लामाबाद में दफनाया गया, जहां बड़ी संख्या में कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोग मौजूद थे। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि लंबे समय से मोस्ट वांटेड माने जाने वाले आतंकी भी वहां बिना किसी डर के दिखाई दिए। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान के उस दावे को कमजोर कर दिया है, जिसमें वह अपने यहां आतंकियों की मौजूदगी से इनकार करता रहा है।
सैयद सलाहुद्दीन और बख्त ज़मीन खान की मौजूदगी ने बढ़ाए सवाल
वायरल वीडियो में हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन और अल-बद्र संगठन के प्रमुख बख्त ज़मीन खान के दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में देखा गया कि जनाज़े के दौरान कई हथियारबंद लोग सुरक्षा घेरे में खड़े थे। कुछ लोग आधुनिक राइफलों और AK-47 जैसे हथियारों के साथ नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी थी कि पूरे इलाके को घेर लिया गया था। माना जा रहा है कि हाल के महीनों में पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकियों की रहस्यमयी हत्याओं के बाद आतंकी संगठनों में डर का माहौल है, इसलिए इस बार अतिरिक्त सुरक्षा रखी गई। वीडियो सामने आने के बाद भारत समेत कई देशों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन इतने खुले तरीके से कैसे सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक कार्यक्रमों में आतंकियों की मौजूदगी पाकिस्तान की सुरक्षा और नीति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कौन था हमजा बुरहान, जिसका नाम पुलवामा हमले से जुड़ा?
हमजा बुरहान का नाम साल 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के बाद चर्चा में आया था। इसी हमले में सीआरपीएफ के 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। बाद में वह पाकिस्तान चला गया और वहां अल-बद्र आतंकी संगठन से जुड़ गया। भारत सरकार ने साल 2022 में उसे आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। जांच एजेंसियों का दावा था कि वह कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने, आतंकियों की भर्ती कराने और फंडिंग नेटवर्क चलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। बताया जाता है कि वह सोशल मीडिया और स्थानीय नेटवर्क के जरिए युवाओं को प्रभावित करने का काम करता था। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि वह पीओके में छिपकर रह रहा था और पहचान छिपाने के लिए एक शैक्षणिक संस्थान में काम कर रहा था। हाल ही में अज्ञात हमलावरों ने उस पर हमला कर दिया, जिसमें उसकी मौत हो गई।
पाकिस्तान पर फिर उठे बड़े सवाल
हमजा बुरहान की हत्या और उसके बाद हुए जनाज़े ने पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। जिस तरह वीडियो में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े चेहरे खुलेआम दिखाई दिए, उसने पाकिस्तान के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर ऐसे लोग सार्वजनिक कार्यक्रमों में खुले तौर पर मौजूद हैं, तो यह आतंकी नेटवर्क की सक्रियता का संकेत माना जा सकता है। दूसरी तरफ पाकिस्तान की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो लगातार चर्चा में बना हुआ है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठ सकता है, क्योंकि लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकियों को शरण देने के आरोप लगते रहे हैं। अब यह मामला फिर उसी बहस को तेज करता दिखाई दे रहा है।
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