उत्तर प्रदेश के Unnao जिले में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब लखनऊ की ओर जा रही सुपर फास्ट तेजस एक्सप्रेस को अचानक रोकना पड़ा। यह घटना कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर मगरवारा स्टेशन के पास डाउन ट्रैक पर सामने आई। जानकारी के अनुसार, रेलवे ट्रैक पर सीमेंट के कई स्लीपर पड़े होने की सूचना मिलते ही गंगाघाट स्टेशन पर ट्रेन को रोक दिया गया। तेजस एक्सप्रेस को करीब 26 मिनट तक वहीं खड़ा रखा गया, जिससे यात्रियों के बीच बेचैनी बढ़ गई। कई यात्रियों को शुरुआत में समझ नहीं आया कि ट्रेन क्यों रोकी गई है, लेकिन जैसे ही ट्रैक पर अवरोध की जानकारी सामने आई, सुरक्षा को लेकर चिंता साफ नजर आने लगी।
ट्रैक पर कैसे पहुंचे स्लीपर
रेलवे अधिकारियों की शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सीमेंट के स्लीपर किसी साजिश के तहत नहीं रखे गए थे। आरपीएफ इंस्पेक्टर के मुताबिक, ट्रैक के किनारे पहले से ही बड़ी संख्या में स्लीपर रखे हुए थे, जो किसी कार्य या स्टोरेज के लिए वहां मौजूद थे। लगातार गुजर रही ट्रेनों की तेज धमक और कंपन के कारण ये स्लीपर धीरे-धीरे खिसकते हुए लूप लाइन पर आ गए। जैसे ही लोको पायलट और रेलवे स्टाफ को इस स्थिति की जानकारी मिली, तुरंत एहतियात बरतते हुए ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई। रेलवे का कहना है कि अगर समय रहते यह कदम न उठाया जाता, तो बड़ा हादसा भी हो सकता था।
तेजस ही नहीं, अन्य ट्रेनों पर भी पड़ा असर
इस घटना का असर सिर्फ तेजस एक्सप्रेस तक सीमित नहीं रहा। ट्रैक पर अवरोध के चलते इस रूट से गुजरने वाली अन्य गाड़ियों को भी रोकना पड़ा या धीमी गति से चलाया गया। कुछ ट्रेनों को सिग्नल पर खड़ा रखा गया, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि, रेलवे कर्मचारियों ने तेजी से मौके पर पहुंचकर स्लीपरों को हटाने का काम शुरू किया। ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करने के बाद ही ट्रेनों की आवाजाही दोबारा शुरू की गई। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी वजह से थोड़ी देर की देरी को स्वीकार किया गया, ताकि किसी भी तरह के जोखिम से बचा जा सके।
रेलवे की सफाई और भविष्य के लिए सख्ती के संकेत
घटना के बाद रेलवे और आरपीएफ की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह कोई साजिश या तोड़फोड़ का मामला नहीं है। फिर भी, ट्रैक के पास रखे निर्माण सामग्री को लेकर अब अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी। रेलवे प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि ट्रैक किनारे रखे गए स्लीपर और अन्य भारी सामान को सुरक्षित दूरी पर रखा जाए, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न बने। यात्रियों ने भी राहत की सांस ली कि समय रहते खतरे को भांप लिया गया। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि रेलवे ट्रैक के आसपास छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए निगरानी और जिम्मेदारी दोनों बेहद जरूरी हैं।
