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उत्तराखंड में कुदरत का अचानक रौद्र रूप: केदारनाथ से गंगोत्री तक थमीं सांसें, चारधाम यात्रा पर क्यों लगा ‘इमरजेंसी ब्रेक’?

उत्तराखंड में मौसम का तांडव! चारधाम यात्रा रोकी गई, केदारनाथ-गंगोत्री में कई श्रद्धालुओं की मौत और उत्तरकाशी-बागेश्वर के ट्रैक पर ट्रेकर्स लापता।

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देवभूमि उत्तराखंड में मौसम के बदले मिजाज ने इस समय पहाड़ों से लेकर मैदान तक हाहाकार मचा रखा है। पवित्र चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं के लिए रविवार का दिन बेहद भारी साबित हुआ। केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा पर निकले छह श्रद्धालुओं की अचानक तबीयत बिगड़ने और इलाज न मिल पाने के कारण दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में मध्य प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और महाराष्ट्र के तीर्थयात्री शामिल हैं। दिल को झकझोर देने वाली एक घटना गंगोत्री मार्ग पर सामने आई, जहाँ महाराष्ट्र के एक बुजुर्ग दंपति (पति-पत्नी) की कुछ ही घंटों के अंतराल में स्वास्थ्य बिगड़ने से मौत हो गई। इस त्रासदी के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से चारधाम यात्रा को जहां का तहां रोक दिया है। केदारनाथ जा रहे यात्रियों को सुबह ही रोककर नजदीकी सुरक्षित ठिकानों पर भेज दिया गया है, क्योंकि मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिन और भी खतरनाक हो सकते हैं।

लाखों की भीड़ और बढ़ता खतरा, आंकड़े दे रहे हैं बड़ी चेतावनी

इस साल चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है, जिसने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अब तक 26 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा के दर पर हाजिरी लगा चुके हैं, जिसमें अकेले केदारनाथ धाम में 10 लाख से अधिक लोग पहुँचे हैं। लेकिन इस भारी भीड़ के बीच राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की ताजा रिपोर्ट ने सबको डरा दिया है। इस सीजन में अब तक स्वास्थ्य समस्याओं, हादसों और लापता होने के कुल 138 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। केवल इतना ही नहीं, सड़क हादसों का ग्राफ भी तेजी से ऊपर भागा है। इस साल जनवरी से लेकर अब तक टिहरी, देहरादून, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी रास्तों पर सड़क दुर्घटनाओं में 125 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं अप्रैल से अब तक प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी कई लोग हताहत हुए हैं। प्रशासन के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती इतनी भारी तादाद में मौजूद यात्रियों को सुरक्षित रखने की है।

गहरे जंगलों और ग्लेशियरों में लापता हुए ट्रेकर्स, रेस्क्यू में जुटी SDRF की टीमें

पहाड़ों पर केवल आम श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि एडवेंचर के लिए आए ट्रेकर्स भी इस खराब मौसम की चपेट में आ गए हैं। उत्तरकाशी के प्रसिद्ध बुग्याल ट्रेक पर गई नैनीताल की महिला ट्रेकर बबीता पांडे पिछले दो दिनों से लापता हैं। उन्हें ढूंढने के लिए वन विभाग, स्थानीय पुलिस और SDRF के 17 जांबाज जवानों की संयुक्त टीम घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों की खाक छान रही है। ऐसा ही एक और परेशान करने वाला मामला बागेश्वर जिले के कपकोट से आया है, जहाँ पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक से वापस लौटते समय नोएडा के रहने वाले अभिषेक चौहान अचानक गायब हो गए। इसके अलावा चंपावत में एक युवक की 200 मीटर गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। वहीं उत्तरकाशी जिला मुख्यालय में शॉर्ट सर्किट की वजह से तीन परिवारों के आशियाने जलकर राख हो गए, हालांकि गनीमत रही कि फायर ब्रिगेड ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और कोई जनहानि नहीं हुई।

5 जून तक राहत की उम्मीद नहीं, मौसम विभाग ने जारी किया ‘महा-अलर्ट’

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के मुताबिक, उत्तराखंड को अभी 5 जून तक इस आसमानी आफत से राहत मिलने वाली नहीं है। मौसम विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों के साथ-साथ हरिद्वार और मैदानी इलाकों में भी आकाशीय बिजली गिरने, ओलावृष्टि होने और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की चेतावनी जारी की है। 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी का अनुमान है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी। देहरादून, नैनीताल, टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में अत्यंत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इसे देखते हुए राज्य सरकार और SEOC ने सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। यात्रियों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, भूस्खलन वाले क्षेत्रों और उफनते नदी-नालों के पास बिल्कुल न जाएं। अगर आप भी उत्तराखंड आने का प्लान बना रहे हैं, तो फिलहाल कुछ दिनों के लिए इसे टाल देना ही सबसे समझदारी भरा फैसला होगा।

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