महाराष्ट्र के जालना जिले में बुधवार का दिन एक दिल दहला देने वाली घटना का साक्षी बना, जब 13 साल की छात्रा आरोही बिटलन ने स्कूल की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। सुबह की सामान्य स्कूल दिनचर्या अचानक चीखों और अफरातफरी में बदल गई। जिस वक्त छात्रा ने यह कदम उठाया, उस समय कई बच्चे नीचे ग्राउंड में थे, जिन्होंने अचानक एक तेज आवाज सुनी और फिर जमीन पर गिरी नन्ही-सी बच्ची को देखा। अध्यापक और छात्र दोनों सदमे में थे, जबकि स्कूल प्रबंधन तुरंत उसे अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते स्कूल के बाहर भारी भीड़ जमा होने लगी।
परिवार का आरोप—दो शिक्षिकाएं कर रहीं थीं लगातार प्रताड़ना
आरोही के माता-पिता ने यह आरोप लगाकर मामला पूरी तरह बदल दिया कि उनकी बेटी पिछले कई महीनों से स्कूल की दो शिक्षिकाओं के गंभीर उत्पीड़न का शिकार हो रही थी। परिवार के अनुसार, बच्ची को क्लास में सबके सामने अपमानित किया जाता था, उसके अंक कम करने की धमकी दी जाती थी और छोटी-छोटी बातों पर उसे मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। माता-पिता का कहना है कि आरोही कई बार घर आकर रोती थी और स्कूल जाने से मना करती थी, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी। परिवार ने शिक्षिकाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि ‘उत्पीड़न से मजबूर होकर की गई मौत’ है।
पुलिस जांच तेज—स्कूल प्रबंधन सवालों के घेरे में
घटना के बाद पुलिस ने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया और उन शिक्षिकाओं से पूछताछ की जिन पर परिवार ने आरोप लगाए हैं। पुलिस ने छात्रा की डायरी, स्कूल बैग और क्लास टीचर की रिपोर्ट भी जब्त कर ली है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्ची पर किस तरह का दबाव था। जांच अधिकारी ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है और स्कूल प्रशासन की भूमिका को भी खंगाला जाएगा। उधर, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और वे पुलिस को हर तरह का सहयोग देंगे। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल ने कई बार ऐसे मामलों को दबाने की कोशिश की है।
शहर में गुस्सा—छात्रों और अभिभावकों का प्रदर्शन
घटना के बाद जालना शहर का माहौल पूरी तरह बदल गया। अभिभावक स्कूल के बाहर जमा होने लगे और उन्होंने शिक्षिकाओं को तुरंत निलंबित करने की मांग की। कई छात्रों ने भी कहा कि क्लास में डर का माहौल रहता था और कई टीचर जरूरत से ज्यादा सख्त व्यवहार करते थे। लोगों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर शिकायतों पर पहले ध्यान दिया जाता तो आज एक बच्ची की जान नहीं जाती। इलाके में बढ़ते दबाव को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने। मामले ने पूरे राज्य में स्कूलों में मानसिक प्रताड़ना और बच्चों पर बढ़ते दबाव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
