भारतीय राजनीति और सोशल मीडिया के गलियारों में इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और सस्पेंस बना हुआ है। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि इस अनोखे नाम के पीछे की कहानी क्या है और देश के बड़े संगठन इस पर क्या राय रखते हैं। अब इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहली आधिकारिक और बेहद महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया सामने आई है। संघ ने न सिर्फ इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत का अहसास भी कराया है।
लोकतंत्र में हर आवाज का स्वागत: RSS
नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने बेहद परिपक्वता से इसका जवाब दिया। आंबेकर ने स्पष्ट किया कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे जीवंत लोकतंत्र है। यहाँ सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया तक, सबको अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर तरह की चर्चा, नए विचारों और जनता की भावनाओं को एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी अचंभे या झटके के रूप में। भारत की व्यवस्थाएं और राजनीतिक दल ऐसी हर चुनौती और विमर्श को संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं।
भारत के ‘जेन-जेड’ युवाओं पर संघ को अटूट भरोसा
इस दौरान संघ की ओर से देश की नई पीढ़ी यानी ‘जेन-जेड’ (Gen-Z) – जिनका जन्म साल 1997 से 2012 के बीच हुआ है – को लेकर एक बेहद सकारात्मक संदेश दिया गया। सुनील आंबेकर ने कहा कि आज का भारतीय युवा बेहद आशावादी है। सोशल मीडिया पर भले ही किसी भी तरह का नैरेटिव या ट्रेंड चल रहा हो, लेकिन जमीन पर देश के युवाओं का भारत की संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे पर अटूट विश्वास है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश की नई पीढ़ी देश को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और वे हमेशा संवैधानिक दायरे में रहकर ही काम करते हैं।
पाकिस्तान से बातचीत और विभाजन पर संघ का रुख
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के अलावा, संघ ने एक और संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बात रखी। आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के पाकिस्तान से जुड़े पिछले बयान पर सफाई देते हुए आंबेकर ने कहा कि संघ हमेशा से जनता के बीच संवाद (People-to-People contact) का समर्थक रहा है। हालांकि, आधिकारिक और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का फैसला सरकार को करना होता है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकारी रास्ते बंद हैं, तब तक दोनों देशों के नागरिकों के बीच व्यापार और संवाद जारी रहना चाहिए ताकि रिश्ते पूरी तरह खत्म न हों। इसके साथ ही उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि आरएसएस हमेशा से भारत के विभाजन के खिलाफ था, और यदि उस दौर में संगठन अधिक मजबूत स्थिति में होता, तो देश का बंटवारा कभी नहीं होने पाता।
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