पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में एक बड़ा सियासी भूचाल तब आया जब तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) की तरफ से दावा किया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर एक महिला ने चाकू से हमला करने की कोशिश की है। हालांकि, कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने इस पूरे दावे को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। पुलिस के स्पष्टीकरण के बाद इस घटना को लेकर चल रही तमाम तरह की अटकलों पर विराम लग गया है।
पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद का स्पष्ट बयान
कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने बुधवार को मीडिया के सामने स्थिति साफ करते हुए कहा कि ममता बनर्जी पर हमले की बात में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को हुई इस घटना के सिलसिले में एक निकाय स्वयंसेवक महिला को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर पिछले एक साल से अपनी ड्यूटी से गैर-हाजिर चल रही थी। पुलिस के मुताबिक, यह कोई सुनियोजित या जानलेवा हमला नहीं था। वह महिला केवल ममता बनर्जी से मिलने के लिए आगे बढ़ी थी, लेकिन वहां मौजूद समर्थकों को गलतफहमी हो गई और उन्हें लगा कि यह कोई हमला है।
टीएमसी सांसद डोला सेन ने दर्ज कराई थी शिकायत
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब टीएमसी सांसद डोला सेन ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जब ममता बनर्जी अपने कालीघाट आवास के पास स्थित मिलन संघ में दुर्गा पूजा का उद्घाटन करने जा रही थीं, तब नशे की हालत में एक महिला ने उन पर चाकू से हमला करने का प्रयास किया। डोला सेन ने अपने बयान में यह भी कहा था कि आरोपी महिला बेहद आक्रामक अंदाज में ममता बनर्जी की ओर बढ़ी थी, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा व चिंता देखने को मिली।
गिरफ्तार महिला और ममता का पुराना परिचय
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी महिला और उसके परिवार का ममता बनर्जी से पुराना परिचय था। पुलिस आयुक्त ने खुलासा किया कि वह महिला और उसके पिता दोनों ही ममता बनर्जी को अच्छी तरह जानते थे। मौके पर मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए उस महिला को धर दबोचा, जिसके बाद पूछताछ में असलियत सामने आई। पुलिस का कहना है कि शुरुआती गलतफहमी के कारण इसे हमले का रूप दे दिया गया, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं हुआ था।
ममता बनर्जी के लिए चल रहा राजनीतिक संघर्ष का दौर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सत्ता की कमान संभाल चुकी है, और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के लिए यह दौर काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। एक तरफ जहां उन्हें पार्टी के भीतर से ही कुछ बगावती तेवरों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ हाथ से सत्ता निकल जाने के कारण उनकी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे संवेदनशील राजनीतिक माहौल में इस तरह की अफवाहों का फैलना और तेजी से तूल पकड़ना राज्य की राजनीति को और अधिक गरमा रहा है।
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