मेरठ के चर्चित और रूह कंपा देने वाले ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ में अदालत ने आखिरकार अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। पति सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या कर उसके शव को नीले ड्रम में छिपाने की दोषी उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। जिला जेल से दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी करार दिया था, जिसके बाद आज यानी 14 अक्टूबर को सजा का यह बड़ा ऐलान किया गया।
भाई का दर्द और परिवार की मांग हुई पूरी
फैसला आने के बाद मृतक सौरभ राजपूत के परिवार ने राहत की सांस ली है। मृतक के भाई राहुल ने न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे शुरू से ही आरोपियों के लिए फांसी की मांग कर रहे थे। परिवार का कहना था कि उन्होंने हमेशा से यही उम्मीद लगाई थी कि उन्हें इंसाफ मिलेगा और जैसा जघन्य अपराध इन दोनों ने उनके भाई के साथ किया है, वैसी ही सजा इन्हें भी मिलनी चाहिए। जुलाई 2025 में शुरू हुए इस ट्रायल के दौरान करीब 13 महीनों तक चली लंबी अदालती बहस में 126 तारीखें पड़ीं और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह कठोर कदम उठाया है।
कैसे खुला था खौफनाक राज और क्या था पूरा मामला
यह सनसनीखेज मामला पिछले साल 19 मार्च का है, जब पुलिस ने सौरभ राजपूत की हत्या का खुलासा करते हुए उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को गिरफ्तार किया था। सौरभ का शव उसके ही घर के अंदर एक नीले रंग के ड्रम से बरामद हुआ था, जिसके बाद इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अवैध संबंध के रास्ते में रोड़ा बन रहे पति को रास्ते से हटाने के लिए मुस्कान और साहिल ने बेहद शातिर तरीके से इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था। ड्रम में शव मिलने के कारण ही इस केस को देशभर में ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ के नाम से जाना गया।
कानून का शिकंजा और समाज के लिए एक कड़ा संदेश
इस हाई-प्रొफाइल मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोनों दोषियों को उनके किए की सजा दे दी है। इस फैसले ने समाज में एक मजबूत संदेश दिया है कि रिश्तों की पवित्रता को तार-तार कर कानून को हाथ में लेने वालों को अंततः न्याय के कटघरे में खड़ा होना ही पड़ता है। 13 महीने की कड़ी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया है और देश भर में चर्चा का विषय बने इस खौफनाक हत्याकांड का एक तार्किक अंत हुआ है।
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