जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक महराज मलिक को बड़ी राहत देते हुए उनकी पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हुई हिरासत को रद्द कर दिया है। यह फैसला उस समय आया जब मलिक पिछले साल सितंबर से एहतियाती हिरासत में थे। कोर्ट ने ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ याचिका पर सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि PSA के तहत जारी हिरासत आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। हालांकि कोर्ट का विस्तृत लिखित आदेश अभी आना बाकी है, लेकिन खुली अदालत में सुनाए गए इस फैसले ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज कर दी है। इस निर्णय के बाद अब मलिक की रिहाई का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
8 सितंबर 2025 को हुई थी गिरफ्तारी, क्या थे आरोप?
महराज मलिक, जो डोडा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और AAP की जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख भी हैं, को 8 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। उन पर ‘सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक गतिविधियों’ में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद उन्हें कठुआ जिला जेल में रखा गया, जहां उन्होंने लगभग 229 दिन बिताए। PSA जैसे कड़े कानून के तहत बिना मुकदमे के हिरासत में रखना आम बात है, लेकिन इस मामले में कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए यह संकेत दिया कि हिरासत का आधार पर्याप्त नहीं था। इस फैसले को कई लोग न्यायिक संतुलन और नागरिक अधिकारों की रक्षा के रूप में देख रहे हैं।
23 फरवरी को सुरक्षित हुआ था फैसला, अब आई राहत
इस मामले में हाई कोर्ट में कई बार सुनवाई हुई थी। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे और 23 फरवरी 2026 को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस फैसले का इंतजार किया जा रहा था। आखिरकार अब अदालत ने हिरासत आदेश को रद्द करते हुए बड़ा संदेश दिया है। मलिक की ओर से पेश हुए वकील अप्पू सिंह ने बताया कि अदालत ने हिरासत को असंवैधानिक मानते हुए इसे खत्म किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद मलिक की रिहाई संभव है, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी जरूरत न हो।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज, AAP नेताओं ने जताई खुशी
इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने खुशी जाहिर की है। पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महराज मलिक का संघर्ष सभी के लिए प्रेरणा है। वहीं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इसे बड़ी जीत बताते हुए कहा कि 229 दिनों की जेल यातना के बाद न्याय मिला है। उन्होंने मलिक के संघर्ष को सलाम करते हुए जल्द रिहाई की उम्मीद जताई। इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भी नई चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि यह मामला सिर्फ एक नेता की रिहाई नहीं, बल्कि PSA जैसे कानून के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े करता है।
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