कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य प्रमुख नेताओं ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका के जरिए विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताते हुए कई महत्वपूर्ण बदलावों और जांच की मांग की है। राहुल गांधी की अगुवाई में दायर इस याचिका में देश की चुनावी निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए कुल 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
एसआईआर प्रक्रिया और दस्तावेजों की मांग
याचिका में सबसे पहले एसआईआर से जुड़ी सभी फाइलों, बैठकों के मिनट्स, आपत्तियों के रिकॉर्ड और ईसिनेट व विरोनेट (ECINET & ERONET) के एक्सेस लॉग कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा, कांग्रेस ने एसआईआर के तहत अब तक हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम बूथ-वार सार्वजनिक करने, नाम काटने के स्पष्ट कारण बताने और लिंग व उम्र के आधार पर इनका वर्गीकरण करने की मांग रखी है। साथ ही, बिना किसी पूर्व नोटिस या सुनवाई का मौका दिए किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से न हटाने का सख्त निर्देश देने की बात कही गई है।
स्वतंत्र ऑडिट और अधिकारियों पर कार्रवाई
विपक्षी गठबंधन ने चुनाव आयोग के इन विवादित फैसलों की संवैधानिक वैधता की जांच की मांग उठाई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों की एक स्वतंत्र समिति बनाकर पूरी प्रक्रिया के ऑडिट की मांग की गई है। इसके साथ ही, मतदाता सूची तैयार करने में नियमों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 32 के तहत उचित कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
एसआईआर पर अंतरिम रोक और आगे की राह
विपक्षी दलों ने मांग की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक देश भर के विभिन्न राज्यों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर तुरंत अंतरिम रोक लगाई जाए। इसके साथ ही ऑनलाइन फॉर्म-6 को ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के अनुरूप रखने और पंजाब व अन्य आगामी चुनाव वाले राज्यों में योग्य नागरिकों को कट-ऑफ तारीख तक पंजीकरण का मौका देने का आग्रह किया गया है। यह याचिका देश की चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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