पंजाब की राजनीति में एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिल का समर्थन करने का फैसला किया है। यह ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और PM मोदी के बीच शुक्रवार को मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं की बैठक में क्या बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन इसके बाद पंजाब के राजनीतिक माहौल में हलचल जरूर बढ़ गई है। अकाली दल के इस फैसले को दोनों पार्टियों के बीच बढ़ती नजदीकी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक दोनों दलों की ओर से किसी नए गठबंधन का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
2020 में टूट गया था BJP-अकाली दल का गठबंधन
बीजेपी और अकाली दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों के बीच गठबंधन 2020 में उस समय टूट गया था, जब केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद बढ़ गए थे। अकाली दल ने बीजेपी से अपना रास्ता अलग कर लिया था। इसके बाद पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। अब राजनीतिक परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस भी राज्य की राजनीति में मजबूत दावेदार है। ऐसे में बीजेपी और अकाली दल के लिए दोबारा साथ आने की संभावना को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, गठबंधन को लेकर दोनों पार्टियों ने अभी तक कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है।
लोकसभा में अकाली दल के पास सिर्फ एक सांसद
अकाली दल के पास इस समय लोकसभा में सिर्फ एक सांसद है। ऐसे में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बिलों पर पार्टी के समर्थन का संख्या के हिसाब से बहुत बड़ा असर नहीं पड़ता। इसके बावजूद पंजाब की राजनीति को देखते हुए अकाली दल का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि क्या दोनों पार्टियां आने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर कोई समझौता करती हैं। अकाली दल की ग्रामीण इलाकों और सिख समुदाय के बीच पकड़ मानी जाती है, जबकि बीजेपी का शहरी क्षेत्रों में अपना आधार है। दोनों दल अगर फिर साथ आते हैं तो उनके पास अलग-अलग वर्गों के वोट को जोड़ने का मौका हो सकता है। यही वजह है कि सुखबीर बादल और पीएम मोदी की मुलाकात के बाद गठबंधन की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है।
पहले भी साथ मिलकर बना चुके हैं पंजाब में सरकार
बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन पंजाब में नया नहीं है। दोनों पार्टियां कई सालों तक एक साथ चुनाव लड़ती रही हैं। 1997, 2007 और 2012 में इस गठबंधन ने पंजाब में सरकार बनाई थी। दोनों दलों का साथ लंबे समय तक राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा। लेकिन 2020 में कृषि कानूनों के विवाद के बाद दोनों की राह अलग हो गई। इसके बाद दोनों पार्टियों को अलग-अलग चुनाव लड़ने का अनुभव अच्छा नहीं रहा। अब बदले राजनीतिक माहौल में दोनों दलों के बीच नजदीकी की खबरों ने पंजाब की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर अकाली दल का समर्थन और सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात को जोड़कर देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुराने साथी एक बार फिर चुनावी मैदान में साथ नजर आएंगे या दोनों पार्टियां अलग-अलग ही आगे बढ़ेंगी।
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