पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए संवाद ही सबसे अच्छा रास्ता है। महबूबा मुफ्ती का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इस समय ऐसा अवसर है, जिसके जरिए दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत हो सकती है। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर बातचीत शुरू करने की अपील की है। उनका मानना है कि लगातार बातचीत से कई पुराने विवादों का समाधान निकल सकता है और क्षेत्र में शांति का माहौल बन सकता है।
RSS नेताओं के बयान का भी किया जिक्र
महबूबा मुफ्ती ने अपने बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कुछ वरिष्ठ नेताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि संघ के कुछ बड़े नेताओं ने भी पाकिस्तान के साथ बातचीत की जरूरत पर अपनी राय रखी है। उनके अनुसार, जब अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े लोग भी संवाद की बात कर रहे हैं, तो इसे सकारात्मक संकेत माना जाना चाहिए। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच केवल सरकारों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच भी संपर्क बढ़ना चाहिए। उनका मानना है कि लोगों का आना-जाना, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बातचीत दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर और सीमा खोलने की भी कही बात
पीडीपी प्रमुख ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के संबंधों को प्रभावित करता रहा है। उनका मानना है कि यदि दोनों देश बातचीत की मेज पर बैठते हैं तो इस विषय पर भी आगे बढ़ने का रास्ता निकल सकता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच बंद पड़े सीमावर्ती रास्तों को फिर से खोलने की भी बात कही। महबूबा मुफ्ती ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस प्रसिद्ध कथन का भी जिक्र किया कि “दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं।” उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना दोनों देशों और पूरे क्षेत्र के हित में है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से उनकी इस अपील पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
SAARC और क्षेत्रीय सहयोग पर भी जताई चिंता
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का असर दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय सहयोग पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि SAARC जैसे महत्वपूर्ण संगठन की गतिविधियां भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की वजह से प्रभावित हुई हैं। उनके अनुसार, यदि भारत और पाकिस्तान के संबंध बेहतर होते हैं तो पूरे दक्षिण एशिया में व्यापार, पर्यटन और सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री की पहचान केवल उसके राजनीतिक फैसलों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होती है कि वह लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान कैसे निकालता है। ऐसे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील दोहराई।
