कर्नाटक के दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव की मतगणना के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब स्ट्रॉन्ग रूम खोलने में परेशानी आ गई। अधिकारियों को जब ईवीएम और जरूरी चुनावी सामग्री निकालनी थी, तो ताला खोलने में दिक्कत आने लगी। बताया जा रहा है कि उपलब्ध चाबी ताले से मेल नहीं खा रही थी, जिससे पूरा काम रुक गया। काफी देर तक कोशिश करने के बाद भी ताला नहीं खुला, जिससे वहां मौजूद लोगों में हल्का तनाव बढ़ गया। इस वजह से काउंटिंग प्रक्रिया पर भी थोड़ी देर के लिए असर पड़ा और प्रशासन को तुरंत वैकल्पिक कदम उठाने पड़े।
चाबी और ताले की गड़बड़ी से बढ़ी उलझन
सूत्रों के मुताबिक, स्ट्रॉन्ग रूम को खोलने के लिए जो चाबी इस्तेमाल की गई, वह सही तरीके से फिट नहीं हो रही थी। पहले तो कर्मचारियों ने कई बार कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस स्थिति ने वहां मौजूद अधिकारियों को भी सोच में डाल दिया। स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम जैसी महत्वपूर्ण मशीनें सुरक्षित रखी जाती हैं, इसलिए हर कदम सावधानी से उठाया जा रहा था। इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई ताकि किसी तरह की अनहोनी या अफवाह न फैले। यह पूरा मामला कुछ देर तक चर्चा का विषय बना रहा।
आखिर हथौड़े का सहारा क्यों लेना पड़ा?
जब तमाम कोशिशों के बावजूद ताला नहीं खुला, तो अधिकारियों ने मजबूरी में कठोर कदम उठाया। सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में हथौड़े से ताला तोड़कर स्ट्रॉन्ग रूम को खोला गया। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय पूरी सावधानी के साथ लिया गया और इसमें चुनाव आयोग के नियमों का पालन किया गया। अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि अंदर रखी सभी ईवीएम और सामग्री पूरी तरह सुरक्षित पाई गई है। इस घटना के बाद मतगणना प्रक्रिया को फिर से सामान्य तरीके से शुरू कर दिया गया।
घटना के बाद उठे सवाल
इस घटना ने चुनावी व्यवस्था को लेकर कुछ सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं, हालांकि प्रशासन इसे एक तकनीकी और प्रबंधन से जुड़ी समस्या बता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता नहीं हुई है और पूरा चुनावी सामान सुरक्षित है। दूसरी ओर, इस घटना को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है और सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। फिलहाल काउंटिंग सामान्य रूप से चल रही है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
