Sunday, February 1, 2026
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रोटी-रोजगार का सवाल बना बवाल, मोबाइल टावर पर चढ़ा कश्मीरी पंडित, फिर ऐसे बचाई गई जान

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जम्मू के बाहरी इलाके नगरोटा स्थित जगती कश्मीरी पंडित प्रवासी शिविर में बुधवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब एक कश्मीरी पंडित युवक अपनी आजीविका से जुड़ी मांगों को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। सुबह के समय जैसे ही लोगों ने उसे ऊंचे टावर पर चढ़ते देखा, पूरे शिविर में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते यह खबर आसपास के इलाकों में फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। युवक का कहना था कि वह वर्षों से दुकान आवंटन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। हाल ही में जब जगती टाउनशिप में दुकानों के आवंटन की सूची जारी हुई और उसमें उसका नाम नहीं था, तो वह पूरी तरह टूट गया। इसी आक्रोश और हताशा में उसने यह खतरनाक कदम उठा लिया।

कार में बैठकर बेचता रहा सामान, परिवार चलाना हुआ मुश्किल

टावर पर चढ़े व्यक्ति ने नीचे खड़े लोगों और अधिकारियों को बताया कि वह पिछले कई सालों से अपनी कार के भीतर बैठकर कॉस्मेटिक और सजावटी सामान बेचकर परिवार का पेट पाल रहा है। स्थायी दुकान न होने की वजह से उसे न तो नियमित ग्राहक मिल पाते हैं और न ही बारिश, धूप और सर्दी से राहत मिलती है। उसका कहना था कि सरकार ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार के लिए कई योजनाओं की घोषणा की, लेकिन जमीनी स्तर पर लाभ बहुत कम लोगों तक ही पहुंच पाया। उसने आरोप लगाया कि दुकान आवंटन प्रक्रिया में कुछ लोगों को प्राथमिकता दी गई, जबकि पुराने आवेदकों को नजरअंदाज कर दिया गया। युवक का दर्द यह भी था कि वह मेहनत करना चाहता है, किसी से मुफ्त मदद नहीं, सिर्फ एक छोटी सी दुकान चाहता है ताकि सम्मान के साथ अपने बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चला सके।

पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूले, घंटों चला समझाने का दौर

जैसे ही घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को मिली, नगरोटा पुलिस, राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारी और आपदा प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को घेर लिया गया, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो। पुलिस अधिकारियों ने युवक से लगातार बातचीत की और उसे शांत रहने के लिए कहा। नीचे खड़े लोग भी उसे समझाते रहे कि वह अपनी जान जोखिम में न डाले। कई घंटों तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान युवक बार-बार यही कहता रहा कि जब तक उसे लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वह नीचे नहीं उतरेगा। प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता जा रहा था, क्योंकि किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी भारी पड़ सकती थी। आखिरकार अधिकारियों ने उसकी मांगों को गंभीरता से लेने का भरोसा दिया।

लिखित आश्वासन के बाद उतरा नीचे, जांच का वादा

काफी मशक्कत के बाद राहत विभाग के अधिकारियों ने लिखित में आश्वासन दिया कि उसकी शिकायत और दुकान आवंटन से जुड़ी फाइल को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा। यह भी कहा गया कि यदि वह सभी मानकों पर खरा उतरता है, तो उसे उचित समाधान दिया जाएगा। लिखित आश्वासन हाथ में मिलने के बाद युवक ने टावर से सुरक्षित नीचे उतरने का फैसला किया। नीचे उतरते ही पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली, वहीं मौके पर मौजूद लोगों ने भी चैन महसूस किया। इस घटना ने एक बार फिर विस्थापित समुदाय की आजीविका से जुड़ी समस्याओं को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों का समय रहते समाधान करे, ताकि किसी को अपनी आवाज सुनाने के लिए इस तरह के खतरनाक कदम न उठाने पड़ें।

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