प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही जापान दौरे के बाद चीन की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चर्चा है क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत करेंगे। तीन बड़े देशों के नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति कई मोड़ों से गुजर रही है। भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद को लेकर तनातनी रही है, ऐसे में इस यात्रा के जरिए रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद भी जताई जा रही है।
पुतिन के साथ मुलाकात को लेकर बढ़ी उत्सुकता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इसी दौरान चीन का दौरा करेंगे, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी से होने की संभावना है। यह बैठक भारत-रूस संबंधों को और मजबूती देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। भारत ने हाल के वर्षों में रूस से ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में गहरे रिश्ते बनाए रखे हैं। ऐसे में चीन की धरती पर होने वाली मोदी-पुतिन मुलाकात एशिया की राजनीति और कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकती है। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और व्यापारिक साझेदारी पर भी चर्चा होने की संभावना है।
अमेरिका-चीन तनाव के बीच दुनिया की नजरें शिखर बैठक पर
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह शिखर बैठक और भी ज्यादा महत्व रखती है। जिनपिंग की मेहमाननवाजी को अंतरराष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि चीन भारत और रूस दोनों देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर अमेरिका को संतुलित करना चाहता है। वहीं भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के जरिए वैश्विक मंच पर संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता आया है। ऐसे में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की यह मुलाकात न सिर्फ एशिया बल्कि पूरे विश्व की राजनीति पर दूरगामी असर डाल सकती है।
