ओमान में पीएम मोदी के जोरदार और ऐतिहासिक स्वागत ने न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि पूरी मुस्लिम दुनिया में एक नई राजनीतिक तस्वीर पेश कर दी है। जॉर्डन के बाद ओमान में मिले सम्मान को पाकिस्तान अलग नजरिए से देख रहा है। इस्लामाबाद की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि वह लंबे समय से चाहता रहा है कि मुस्लिम देश भारत को केवल कश्मीर के मुद्दे के चश्मे से देखें। लेकिन ओमान जैसे अहम मुस्लिम देश का भारत के साथ खुलकर खड़ा होना इस रणनीति को कमजोर करता नजर आ रहा है। पाकिस्तानी विश्लेषकों का मानना है कि यह स्वागत केवल औपचारिक नहीं, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का संकेत है, जिसमें भारत को एक भरोसेमंद और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के तौर पर देखा जा रहा है।
कमर चीमा का बयान, क्यों अहम है ओमान भारत के लिए
पाकिस्तानी एक्सपर्ट कमर चीमा ने खुलकर स्वीकार किया कि ओमान और भारत के रिश्तों के पीछे मजबूत रणनीतिक हित हैं। उन्होंने कहा कि ओमान भारत के लिए समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। भारत के करीब 40 प्रतिशत तेल आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आते हैं और ओमान इस जलमार्ग के एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर स्थित है। ऐसे में अगर कभी इस क्षेत्र में तनाव या संकट पैदा होता है, तो ओमान भारत को समय रहते चेतावनी दे सकता है और दोनों देशों की नौसेनाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर हालात संभाल सकती हैं। कमर चीमा के मुताबिक, यही वजह है कि ओमान को भारत एक “गेटकीपर” की तरह देखता है, जो पूरे इंडियन ओशियन रीजन में सुरक्षा संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
दुकम पोर्ट और इंडियन नेवी की बढ़ती पहुंच
कमर चीमा ने ओमान के दुकम पोर्ट को भारत के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक एसेट बताया। उन्होंने कहा कि दुकम पोर्ट के जरिए भारत को न सिर्फ लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील चोक पॉइंट को बायपास करने का विकल्प भी मिलता है। इंडियन नेवी को ओमान में लॉजिस्टिक एक्सेस मिलने से भारत की पहुंच रेड सी, अफ्रीका और अरेबियन सी तक और मजबूत हुई है। दोनों देशों के बीच जॉइंट पेट्रोलिंग, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन और समुद्री निगरानी जैसे कदम पहले से चल रहे हैं। पाकिस्तान के लिए चिंता की बात यह है कि ये सभी गतिविधियां भारत को इंडियन ओशियन में एक प्रभावशाली समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित कर रही हैं।
ओमान-भारत साझेदारी और पाकिस्तान की बढ़ती बेचैनी
कमर चीमा का मानना है कि ओमान भारत के साथ साझेदारी इसलिए भी बढ़ा रहा है क्योंकि वह आतंकवाद, तस्करी और समुद्री अपराधों के खिलाफ एक मजबूत और भरोसेमंद देश के साथ खड़ा होना चाहता है। भारत खुद को इंडियन ओशियन रीजन में “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” के रूप में पेश करता रहा है और ओमान इस भूमिका को स्वीकार करता दिख रहा है। यही कारण है कि मुस्लिम देशों में भारत की बढ़ती स्वीकार्यता पाकिस्तान को असहज कर रही है। जहां पाकिस्तान अब भी पुराने मुद्दों और सीमित सोच में उलझा नजर आता है, वहीं भारत आर्थिक, ऊर्जा और सुरक्षा हितों के जरिए नए रिश्ते गढ़ रहा है। ओमान में पीएम मोदी का स्वागत इसी बदलती हकीकत का प्रतीक है, जिसने पाकिस्तान की चिंता और झुंझलाहट को खुलकर सामने ला दिया है।
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