दुबई एयर शो में शुक्रवार को वह पल सामने आया, जिसने हजारों दर्शकों को कुछ सेकंड के लिए स्तब्ध कर दिया। आसमान में अपने तेज़ और सटीक करतबों से दर्शकों को रोमांचित कर रहा भारतीय फाइटर जेट तेजस अचानक असामान्य ढंग से झूलता हुआ नीचे की ओर आया। देखते ही देखते विमान इतनी तेज़ी से जमीन की तरफ गिरा कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। टकराते ही एक तेज धमाके के साथ आग की ऊंची लपटें उठीं और कुछ ही पलों में पूरा क्षेत्र धुएं से भर गया। एयर शो का वह उत्साह पर्दे की तरह गिरा और उसके पीछे रह गया सिर्फ हादसे का सन्नाटा। यह वीडियो अब सामने आ चुका है, जिसमें तेजस का अंतिम मोड़ और भयानक टक्कर साफ दिखती है। हादसे की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि टकराते ही विमान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया।
भारतीय वायुसेना ने पुष्टि की कि इस दुर्घटना में विमान के पायलट की मौत हो गई। आधिकारिक बयान में कहा गया कि पायलट को गंभीर चोटें आईं, जिनसे उनकी जान बचाई नहीं जा सकी। वायुसेना ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए यह भी बताया कि दुर्घटना की वजह जानने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित कर दी गई है। यह घटना तेजस कार्यक्रम के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि यह सात साल में दूसरी बार है जब इस उन्नत हल्के लड़ाकू विमान को हादसे का सामना करना पड़ा है।
दो साल में दूसरा बड़ा झटका
दुबई एयर शो में हुआ यह हादसा सिर्फ एक प्रदर्शन दुर्घटना नहीं, बल्कि उन चर्चाओं को फिर से जिंदा कर गया है जो दो साल पहले राजस्थान के जैसलमेर में हुए तेजस क्रैश के बाद उठी थीं। मार्च 2024 में हुए उस हादसे को तेजस के 23 साल के इतिहास की पहली दुर्घटना बताया गया था। वहां पायलट समय रहते सफलतापूर्वक इजेक्ट हो गया था और उसकी जान बच गई थी। लेकिन दुबई की घटना में किस्मत साथ नहीं दे सकी।
तेजस की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े सवाल फिर एक बार तकनीकी विशेषज्ञों और एयरोस्पेस इंडस्ट्री के सामने खड़े हो गए हैं। खासतौर पर तब जब यह विमान भारत की रक्षा रणनीति में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि एयर शो में उड़ानें सामान्य मिशनों की तुलना में कहीं अधिक जोखिमभरी होती हैं, जहां कम ऊंचाई, तीखे मोड़ और जटिल करतब शामिल होते हैं। इसलिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट ही यह साफ करेगी कि यह घटना तकनीकी खराबी का नतीजा थी, पायलट की स्थिति का, या फिर एयर शो की किसी अनिवार्य जोखिमभरी उड़ान का परिणाम।
जिसकी खासियत बन गई चर्चा का विषय
तेजस भारतीय रक्षा प्रणाली का वह आधुनिक हथियार है जिसने दुनिया के कई देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। 4.5-जनरेशन कैटेगरी का यह मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट अपने हल्के वजन, बेहतरीन गतिशीलता और आधुनिक एवियोनिक्स के कारण वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुका है। इसे हवाई सुरक्षा से लेकर ऑफेंसिव ऑपरेशन और नज़दीकी लड़ाई तक के लिए तैयार किया गया है।
इस विमान की सबसे अनोखी तकनीक है मार्टिन-बेकर जीरो-जीरो इजेक्शन सीट, जिसे दुनिया की सबसे सुरक्षित इजेक्शन प्रणालियों में गिना जाता है। यह सीट पायलट को शून्य ऊंचाई और शून्य गति पर भी विमान से बाहर निकाल सकती है, यानी टेकऑफ, लैंडिंग या किसी कम ऊंचाई वाले स्टंट के दौरान भी। यही वजह है कि जैसलमेर हादसे में पायलट की जान बची थी। लेकिन दुबई की घटना में संभवतः समय या ऊंचाई इतनी कम थी कि इजेक्शन सिस्टम पूरा कार्य नहीं कर पाया।
भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री तेजस को भविष्य के फाइटर फ्लीट की रीढ़ मान रही है, ऐसे में यह दुर्घटना एक बड़ी चिंता का कारण है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि हर उन्नत फाइटर जेट के इतिहास में ऐसे चरण आते हैं, राफेल, एफ-16, ग्रिपेन और यूरोफाइटर जैसी विश्व स्तरीय मशीनें भी अपने शुरुआती वर्षों में कई हादसों से गुजरी हैं। तेजस भी उसी यात्रा का हिस्सा है, और लगातार सुधार एवं तकनीकी अपग्रेड इस कार्यक्रम को और मजबूत करते रहेंगे।
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