हरियाणा के नूंह जिले में गुरुवार सुबह घने कोहरे ने एक बार फिर जानलेवा रूप दिखाया। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर गांव शेखपुर के पास जयपुर से दिल्ली की ओर जा रही एक ट्रैवल बस आगे चल रहे कंटेनर से जा टकराई। सुबह क रीब साढ़े सात बजे हुए इस हादसे के वक्त दृश्यता बेहद कम थी, जिससे ड्राइवर को आगे खड़े कंटेनर का अंदाजा नहीं लग पाया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बस में सवार दो यात्रियों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। एक्सप्रेसवे पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और यातायात भी प्रभावित हुआ।
हादसे में पुलिसकर्मी समेत दो की मौत, कई यात्री घायल
इस दर्दनाक हादसे में जिन दो लोगों की जान गई, उनमें एक दिल्ली पुलिस का जवान भी शामिल था। मृतकों की पहचान भवानी सिंह राजपूत, निवासी गांव खेड़ा मंगल सिंह, जिला अलवर (राजस्थान) और मोहर सिंह मीणा, निवासी गांव ढीगारिया भीम, तहसील बैजूपाला, जिला दौसा (राजस्थान) के रूप में हुई है। भवानी सिंह बस में परिचालक के रूप में कार्यरत था, जबकि मोहर सिंह मीणा दिल्ली पुलिस में तैनात था और ड्यूटी के लिए दिल्ली जा रहा था। हादसे में बस में सवार 5 से 6 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और हाईवे पेट्रोलिंग टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया।
घायलों का इलाज जारी, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए
हादसे में घायल यात्रियों को तुरंत नजदीकी मांडिखेड़ा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस और कंटेनर को क्रेन की मदद से सड़क से हटवाया, जिसके बाद एक्सप्रेसवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका। मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। जांच अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि हादसे की जांच की जा रही है और पीड़ित परिवारों की शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हादसे के समय वाहन की गति क्या थी और कोहरे को लेकर पर्याप्त सावधानियां बरती गई थीं या नहीं।
कोहरे में लगातार हो रहे हादसे, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सर्दियों के मौसम में घना कोहरा एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों में इस हाईवे पर कोहरे की वजह से कई सड़क हादसे सामने आ चुके हैं। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि कोहरे के समय गति सीमा का सख्ती से पालन, रिफ्लेक्टिव संकेतक, चेतावनी बोर्ड और पेट्रोलिंग को और मजबूत किया जाना चाहिए। खासतौर पर सुबह के वक्त जब दृश्यता बेहद कम होती है, तब भारी वाहनों की आवाजाही दुर्घटनाओं की आशंका को और बढ़ा देती है। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एक्सप्रेसवे पर कोहरे के दौरान सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त हैं। लोगों की मांग है कि ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे ड्यूटी पर जा रहे सुरक्षाकर्मियों और आम यात्रियों की जान सुरक्षित रह सके।
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