दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर चर्चा में है। जी5 पर रिलीज होने के दो दिन बाद ही फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। अब फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने इस पर अपनी राय रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सतलुज’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसी कहानी है जो इतिहास के एक दर्दनाक सच को सामने लाती है। उनके मुताबिक, इस फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों को देखना चाहिए और इस पर खुलकर बात होनी चाहिए।
दिलजीत और निर्देशक की तारीफ की
राम गोपाल वर्मा ने दिलजीत दोसांझ के अभिनय की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दिलजीत ने बिना किसी दिखावे के बहुत अच्छा काम किया है। साथ ही निर्देशक हनी त्रेहान की भी सराहना की। वर्मा ने कहा कि फिल्म में किसी तरह की सनसनी फैलाने की कोशिश नहीं की गई, बल्कि पूरे मामले को शांत और सच्चे तरीके से दिखाया गया है। यही वजह है कि फिल्म दर्शकों पर गहरा असर छोड़ती है।
फिल्म हटाने पर जताई नाराजगी
राम गोपाल वर्मा ने फिल्म को ओटीटी से हटाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई फिल्म लोगों को सोचने पर मजबूर करती है, तो उसे रोकना नहीं चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि ‘सतलुज’ के साथ वैसा व्यवहार न करें जैसा फिल्म में दिखाए गए मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के साथ हुआ था। उन्होंने कहा कि सच को दबाने की कोशिश करने से वह और ज्यादा लोगों तक पहुंचता है। वर्मा ने यह भी कहा कि फिल्म का ‘एनकाउंटर’ नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे देखने और समझने का मौका मिलना चाहिए।
क्या है ‘सतलुज’ का मामला?
हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी ‘सतलुज’, जिसे पहले ‘पंजाब 95’ के नाम से जाना जाता था, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है। यह फिल्म कई साल तक रिलीज का इंतजार करती रही। आखिरकार 3 जुलाई को जी5 पर रिलीज हुई, लेकिन सिर्फ दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इसके बाद फिल्म को लेकर बहस शुरू हो गई। अब राम गोपाल वर्मा के समर्थन के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है।
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